आचार्य व्यंकटेश शर्मा (डब्लू सिंह)
Political & Social Leader | Educationist | Ayurveda & Astrology Researcher | Former Legislative Council Candidate
“विद्यार्थी राजनीति से सार्वजनिक जीवन, सामाजिक सेवा और भारतीय पारंपरिक ज्ञान के शोध तक एक बहुआयामी यात्रा।”
Profile Overview
पूरा नाम: Vankatesh Kumar Sharma Urf Dablu Singh
प्रचलित नाम: डब्लू सिंह / Dablu Singh
अन्य नाम: Acharya Vankatesh Sharma
जन्म: 11 अप्रैल 1977
मूल निवास: सुल्तानपुर, मोकामा, जिला पटना, बिहार
राष्ट्रीयता: भारतीय
कार्यक्षेत्र: राजनीति, समाजसेवा, शिक्षा, ज्योतिष, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा
राजनीतिक संबद्धता: भारतीय जनता पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक एवं संगठनात्मक भूमिकाएँ
पूर्व राजनीतिक संबद्धताएँ: लोक जनशक्ति पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड)
प्रमुख संगठनात्मक भूमिका: बिहार भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य
चुनावी अनुभव: पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान परिषद चुनाव
सामाजिक भूमिका: राष्ट्रीय अध्यक्ष, स्नातक चेतना मंच
प्रमुख पुस्तक: शंख असंख्य दुखों का निवारण
Introduction
आचार्य व्यंकटेश शर्मा, जिन्हें राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में डब्लू सिंह के नाम से भी जाना जाता है, बिहार से जुड़े एक राजनीतिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यकर्ता हैं। उनका सार्वजनिक जीवन छात्र राजनीति से प्रारंभ होकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, विश्वविद्यालय व्यवस्था, चुनावी राजनीति तथा आयुर्वेद, ज्योतिष और प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित शोध गतिविधियों तक विस्तृत रहा है।
अपने सार्वजनिक जीवन के अलग-अलग चरणों में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) के साथ विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ निभाईं। बाद में वे पुनः भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और बिहार भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति सहित संगठन के विभिन्न स्तरों पर सक्रिय रहे।
राजनीति के अतिरिक्त उनकी पहचान भारतीय पारंपरिक ज्ञान, विशेष रूप से ज्योतिष, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और वैदिक अध्ययन में रुचि रखने वाले व्यक्ति के रूप में भी रही है।
उनकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने आधुनिक विज्ञान की औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का भी अध्ययन किया। उनके सामाजिक एवं शोध कार्यों में आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है।
Early Life
आचार्य व्यंकटेश शर्मा का जन्म 11 अप्रैल 1977 को हुआ। उनका मूल निवास सुल्तानपुर, मोकामा, जिला पटना, बिहार है।
बिहार की सामाजिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों के बीच उनका प्रारंभिक जीवन विकसित हुआ। विद्यार्थी जीवन से ही सामाजिक एवं सार्वजनिक विषयों में उनकी रुचि ने आगे चलकर उन्हें छात्र राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ दिया।
उनका व्यक्तित्व केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। शिक्षा के दौरान विज्ञान के साथ-साथ भारतीय दर्शन, ज्योतिष, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर भी उनका रुझान विकसित हुआ।
Education & Academic Background
आचार्य व्यंकटेश शर्मा ने आधुनिक विज्ञान और भारतीय पारंपरिक शिक्षा—दोनों क्षेत्रों में अध्ययन किया।
उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में शामिल हैं:
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बी.एससी. ऑनर्स (भौतिकी) — मगध विश्वविद्यालय, 1993–1996
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उप-शास्त्री, ज्योतिष (गणित) — कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय
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शास्त्री, ज्योतिष (गणित) — कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय
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आचार्य, ज्योतिष (गणित) — काशी हिंदू विश्वविद्यालय
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एम.एससी. भौतिकी — पटना विश्वविद्यालय, 2003–2004
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डिप्लोमा इन आयुर्वेद — 2018–2020
भौतिक विज्ञान से लेकर ज्योतिष एवं आयुर्वेद तक फैली उनकी शैक्षणिक यात्रा उनकी बहुविषयक रुचि को दर्शाती है।
Beginning of Public & Student Life
आचार्य व्यंकटेश शर्मा के सार्वजनिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत विद्यार्थी राजनीति से हुई।
1990 से 1992 के दौरान वे विद्यार्थी परिषद से सक्रिय रूप से जुड़े रहे और छात्र एवं सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया।
विद्यार्थी जीवन में उन्होंने विश्वविद्यालय व्यवस्था और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
वर्ष 2001 में छात्र हितों एवं प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित मांगों को लेकर उन्होंने सात दिवसीय अनशन का नेतृत्व किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संबंधित मांगों पर विचार किया गया और सुधार संबंधी कदम उठाए गए।
यह घटनाक्रम उनके सार्वजनिक जीवन में आंदोलनात्मक राजनीति और छात्र हितों से जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण अध्याय बना।
Early Political Journey with BJP
वर्ष 1992 से 2003 के बीच वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे।
इस दौरान उन्होंने बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं कैलाशपति मिश्र और सुशील कुमार मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में पार्टी संगठन के विस्तार से संबंधित कार्यों में भाग लिया।
वर्ष 1998 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) की प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य के रूप में जिम्मेदारी मिली।
युवा राजनीति से प्रारंभ हुई उनकी यात्रा धीरे-धीरे प्रदेश स्तर के संगठनात्मक कार्यों तक पहुँची।
Political Journey with Lok Janshakti Party
वर्ष 2003 में आचार्य व्यंकटेश शर्मा लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) से जुड़े।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान के नेतृत्व में उन्होंने बिहार प्रदेश महासचिव के रूप में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाई।
वर्ष 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में जटिल राजनीतिक परिस्थितियाँ बनीं। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और विधायकों के बीच सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हुईं।
उनके संबंध में उपलब्ध विवरणों में इस अवधि के दौरान लोजपा विधायकों के राजनीतिक समन्वय एवं लामबंदी से जुड़े प्रयासों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। जमशेदपुर के ‘10th Mile Stone’ होटल से जुड़ा राजनीतिक प्रसंग भी इसी दौर का हिस्सा बताया गया है।
Role in Janata Dal (United)
वर्ष 2005 में वे 19 विधायकों के साथ जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े।
2005 से 2008 के दौरान उन्होंने बिहार प्रदेश महासचिव के रूप में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में कार्य किया।
इस दौरान उनका कार्यक्षेत्र केवल राजनीतिक संगठन तक सीमित नहीं रहा।
वर्ष 2006 से 2009 तक वे पटना विश्वविद्यालय की सीनेट के सदस्य भी रहे। सीनेट सदस्य के रूप में उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विषयों से जुड़ी गतिविधियों में योगदान दिया।
राजनीतिक संगठन और विश्वविद्यालय व्यवस्था—दोनों क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उनके सार्वजनिक जीवन के इस दौर को विशेष बनाती है।
Return to Bharatiya Janata Party
वर्ष 2013 उनके राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आया।
जनता दल (यूनाइटेड) से अलग होने के बाद उन्होंने 12 नवंबर 2013 को अपने समर्थकों के साथ पुनः भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
इसके बाद वे बिहार भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हुए और प्रदेश स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियों से जुड़े।
उनका नाम बिहार भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति से भी जुड़ा रहा।
2014 Bihar Legislative Council Election
भारतीय जनता पार्टी में पुनः शामिल होने के बाद आचार्य व्यंकटेश शर्मा ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान परिषद चुनाव में भाग लिया।
वर्ष 2014 में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्हें इस चुनाव में 14,000 से अधिक मत प्राप्त हुए।
यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा, क्योंकि इसके माध्यम से उन्होंने स्नातक मतदाताओं, शिक्षित युवाओं और कर्मचारियों से जुड़े विषयों को चुनावी मंच पर प्रमुखता से रखा।
Role in BJP Kisan Morcha
भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय रहते हुए आचार्य व्यंकटेश शर्मा किसान राजनीति और किसान कल्याण से संबंधित संगठनात्मक गतिविधियों से भी जुड़े।
भाजपा किसान मोर्चा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त के नेतृत्व में उन्होंने राष्ट्रीय किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में सदस्य के रूप में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाई।
इस भूमिका के दौरान वे किसान हित, कृषि क्षेत्र और ग्रामीण समाज से संबंधित संगठनात्मक गतिविधियों में सहभागी रहे।
Legal & Public Interest Activities
वर्ष 2017 के दौरान उनका नाम कुछ महत्वपूर्ण जनहित एवं राजनीतिक विषयों के साथ भी जुड़ा।
उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने IRCTC होटल टेंडर तथा ‘नौकरी के बदले जमीन’ से जुड़े मामलों में संबंधित जांच एजेंसियों को सूचना एवं दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई।
इन मामलों में उन्हें सूचनादाता के रूप में प्रस्तुत किए जाने का भी उल्लेख मिलता है।
इसी अवधि में सार्वजनिक महत्व के विषयों को लेकर न्यायिक माध्यम अपनाने और सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका से संबंधित गतिविधियों का उल्लेख भी उनकी सार्वजनिक प्रोफ़ाइल में किया जाता है।
2020 Legislative Council Election
वर्ष 2020 में आचार्य व्यंकटेश शर्मा ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में सक्रिय भागीदारी की।
अक्टूबर 2020 में उन्होंने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान परिषद का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा।
इस चुनाव में उनके अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल थे:
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युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
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स्नातकों के अधिकार
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शिक्षित बेरोजगारों से संबंधित समस्याएँ
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कर्मचारियों के हित
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पेंशन से संबंधित विषय
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शिक्षा एवं प्रशासनिक सुधार
इस चुनाव ने उनकी राजनीतिक पहचान को राजनीतिक संगठनों से आगे बढ़ाकर स्वतंत्र जनप्रतिनिधित्व के प्रयास से भी जोड़ा।
Social & Educational Initiatives
राजनीतिक गतिविधियों के समानांतर आचार्य व्यंकटेश शर्मा सामाजिक, शैक्षणिक एवं भारतीय पारंपरिक ज्ञान से संबंधित संस्थागत गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं।
उनके द्वारा स्थापित अथवा उनसे जुड़ी प्रमुख संस्थाओं में शामिल हैं:
Ram Narayan Seva Sansthan
सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य तथा शोध से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित संस्था।
Kashi Ved Vedang Vidyapeeth
वेद, वेदांग और भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जुड़े अध्ययन एवं जागरूकता को प्रोत्साहित करने वाला मंच।
Prakritik Chikitsa Jyotish Ayurveda Shodh Sansthan
प्राकृतिक चिकित्सा, ज्योतिष एवं आयुर्वेद के विभिन्न विषयों पर अध्ययन और शोध गतिविधियों से जुड़ी संस्था।
Narayan Parivar
सामाजिक एवं सेवा गतिविधियों से संबंधित संगठनात्मक मंच।
Snatak Chetna Manch
आचार्य व्यंकटेश शर्मा इस संगठन से राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जुड़े रहे हैं। इस मंच के माध्यम से स्नातकों, शिक्षित युवाओं और उनसे संबंधित सामाजिक, रोजगार एवं अधिकारों के विषयों को उठाने का प्रयास किया गया।
Ayurveda, Naturopathy & Astrology
राजनीति और समाजसेवा के अतिरिक्त आचार्य व्यंकटेश शर्मा की विशेष रुचि आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, ज्योतिष और भारतीय पारंपरिक ज्ञान में रही है।
वर्ष 2021 से 2025 के बीच वाराणसी में उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा, ज्योतिष और आयुर्वेद से संबंधित विभिन्न विषयों पर अध्ययन एवं गतिविधियाँ कीं।
उनका प्रयास भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विषयों को व्यवस्थित अध्ययन और व्यावहारिक प्रयोगों के माध्यम से समझने की दिशा में रहा है।
Research on Shankh Abhyang & Shankh Dhwani
वर्ष 2022 में राम नारायण सेवा संस्थान के अंतर्गत आयुर्वेद की दैवव्यपाश्रय चिकित्सा अवधारणा से संबंधित एक प्रयोगात्मक अध्ययन किए जाने का उल्लेख मिलता है।
इस अध्ययन में शंख अभ्यंग और शंख ध्वनि के मानसिक, भावनात्मक एवं न्यूरोलॉजिकल प्रभावों का अवलोकन किया गया।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस अध्ययन में 400 से अधिक लोगों को शामिल किया गया।
यह अध्ययन पारंपरिक भारतीय चिकित्सा अवधारणाओं और उनके संभावित प्रभावों को समझने का एक प्रयास था। ऐसे स्वास्थ्य संबंधी दावों की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए स्वतंत्र एवं नियंत्रित चिकित्सा अनुसंधान आवश्यक होता है।
Book & Publication
आचार्य व्यंकटेश शर्मा की पारंपरिक भारतीय ज्ञान एवं शंख से संबंधित अध्ययन यात्रा उनकी पुस्तक:
“शंख: अनगिनत दुखों का निवारण”
के माध्यम से भी सामने आती है।
इस पुस्तक का प्रकाशन ब्लूरोज पब्लिकेशन द्वारा फरवरी 2023 में किया गया।
पुस्तक में शंख से जुड़ी भारतीय परंपराओं, दर्शन, सांस्कृतिक धारणाओं और शंख ध्वनि से संबंधित विभिन्न स्वास्थ्य मान्यताओं एवं दावों का संकलन और विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
यह कृति उनके राजनीतिक जीवन से अलग उनके अध्ययन, लेखन और भारतीय पारंपरिक ज्ञान में रुचि का प्रतिनिधित्व करती है।
Political Journey – Timeline
1990–1992 — विद्यार्थी परिषद में सक्रिय सदस्य के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत।
1992–2003 — भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक कार्य।
1998 — भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य।
2001 — छात्र हित एवं विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े मुद्दों को लेकर सात दिवसीय अनशन।
2003–2005 — लोक जनशक्ति पार्टी के बिहार प्रदेश महासचिव।
2005 — बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम एवं राजनीतिक समन्वय से संबंधित गतिविधियाँ।
2005–2008 — जनता दल (यूनाइटेड) के बिहार प्रदेश महासचिव।
2006–2009 — पटना विश्वविद्यालय सीनेट सदस्य।
2013 — भारतीय जनता पार्टी से पुनः सक्रिय जुड़ाव एवं प्रदेश स्तरीय संगठनात्मक भूमिका।
12 नवंबर 2013 — समर्थकों के साथ भाजपा में पुनः प्रवेश।
2014 — पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के रूप में बिहार विधान परिषद चुनाव।
2016–2019 — भाजपा किसान मोर्चा से राष्ट्रीय स्तर की संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ।
2017 — जनहित, सूचना एवं कानूनी गतिविधियों से जुड़े मामलों में सक्रियता का उल्लेख।
सितंबर 2019 — बिहार भाजपा प्रदेश कार्यसमिति से संगठनात्मक जुड़ाव।
अक्टूबर 2020 — पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार।
2021–2025 — वाराणसी में प्राकृतिक चिकित्सा, ज्योतिष और आयुर्वेद से संबंधित अध्ययन एवं गतिविधियाँ।
2022 — शंख अभ्यंग एवं शंख ध्वनि से संबंधित प्रयोगात्मक अध्ययन।
फरवरी 2023 — पुस्तक “ शंख असंख्य दुखों का निवारण” का प्रकाशन।
A Multi-Dimensional Public Journey
आचार्य व्यंकटेश शर्मा का सार्वजनिक जीवन कई अलग-अलग क्षेत्रों के समन्वय के रूप में सामने आता है।
एक ओर वे छात्र राजनीति से राज्य और राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक संगठनों तक पहुँचे, वहीं दूसरी ओर उन्होंने शिक्षा, विश्वविद्यालय प्रशासन, किसान संगठन, सामाजिक संस्थाओं तथा भारतीय पारंपरिक ज्ञान के अध्ययन से स्वयं को जोड़े रखा।
उनकी सार्वजनिक पहचान को प्रमुख रूप से राजनीतिक संगठन, चुनावी राजनीति, सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्य तथा भारतीय पारंपरिक ज्ञान और शोध के विभिन्न आयामों में देखा जा सकता है।
राजनीतिक क्षेत्र में उन्होंने विभिन्न संगठनों में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियाँ निभाईं, जबकि चुनावी राजनीति में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान परिषद चुनाव में भाग लिया।
सामाजिक क्षेत्र में वे विभिन्न संस्थाओं तथा स्नातक समुदाय से जुड़े मंचों के माध्यम से सक्रिय रहे। वहीं ज्योतिष, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित अध्ययन एवं लेखन उनके व्यक्तित्व का एक अलग पक्ष प्रस्तुत करता है।
Legacy & Vision
विद्यार्थी राजनीति से शुरू हुई आचार्य व्यंकटेश शर्मा उर्फ डब्लू सिंह की यात्रा बिहार की राजनीति, विश्वविद्यालय व्यवस्था, सामाजिक संगठनों और भारतीय पारंपरिक ज्ञान के अध्ययन तक विस्तृत हुई है।
उनका सार्वजनिक जीवन विभिन्न राजनीतिक संगठनों और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों से गुजरते हुए विकसित हुआ, लेकिन शिक्षा, सामाजिक विषयों और जनसरोकार से जुड़े मुद्दे उनकी गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहे।
राजनीति से लेकर समाजसेवा और शिक्षा से लेकर आयुर्वेद एवं ज्योतिष तक उनकी बहुआयामी यात्रा उन्हें एक ऐसे सार्वजनिक व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसकी पहचान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है।
आचार्य व्यंकटेश शर्मा (डब्लू सिंह) की जीवन यात्रा में राजनीति, संगठन, शिक्षा, समाजसेवा, शोध, लेखन और भारतीय ज्ञान परंपरा का एक विशिष्ट समन्वय दिखाई देता है।

