✦ रूचि बाजपेई शर्मा ✦
लेखिका • सम्पादक • चित्रकार • धावक • प्रकाशन निदेशक • साहित्यिक एवं सांस्कृतिक व्यक्तित्व
शब्दों की संवेदना, रंगों की अभिव्यक्ति, खेल का अनुशासन और सृजन की निरंतर यात्रा
“जब रचनात्मकता किसी एक माध्यम में सीमित नहीं रहती, तब वह जीवन के अनेक रूपों में अपनी पहचान बनाती है।”
परिचय
रूचि बाजपेई शर्मा मध्य प्रदेश के खंडवा में रहने वाली एक बहुआयामी रचनात्मक व्यक्तित्व हैं, जिनकी सक्रियता साहित्य, सम्पादन, चित्रकला, प्रकाशन, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों जैसे अनेक क्षेत्रों में दिखाई देती है।
वे एक लेखिका और कवयित्री होने के साथ-साथ सम्पादक, चित्रकार, एथलीट, मैराथन धावक और प्रकाशन निदेशक के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखती हैं। साहित्य के प्रति उनकी संवेदनशीलता, कला के प्रति आकर्षण और जीवन के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण ने उनकी यात्रा को विशेष बनाया है।
उनकी प्रकाशित साहित्यिक कृतियों में ‘गुलमोहर हो तुम’, ‘रजनीगंधा’ और ‘सेमल’ प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त ‘किस्सों का बयाना’, ‘किंशुक’ तथा एक उपन्यास उनकी आगामी रचनात्मक परियोजनाओं में शामिल बताए गए हैं।
वे ‘कलम हस्ताक्षर’ मासिक हिन्दी साहित्य पत्रिका के संचालन से जुड़ी हैं और रूचि पब्लिकेशन की डायरेक्टर के रूप में प्रकाशन जगत में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
एक व्यक्तित्व — अनेक रचनात्मक आयाम
रूचि बाजपेई शर्मा की सबसे विशिष्ट विशेषता उनकी बहुआयामी सक्रियता है।
उनके लिए सृजन केवल कागज पर शब्द लिखने तक सीमित नहीं है। कभी उनकी भावनाएँ कविता बनती हैं, कभी रंगों और रेखाओं के माध्यम से कैनवास पर उतरती हैं और कभी दौड़ के मैदान में अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प का रूप लेती हैं।
उनके व्यक्तित्व में चार प्रमुख पक्ष स्पष्ट दिखाई देते हैं—
साहित्य की संवेदनशीलता, कला की कल्पनाशीलता, खेल की दृढ़ता और प्रकाशन-प्रबंधन की दक्षता।
यही संयोजन उन्हें एक सामान्य साहित्यकार की परिभाषा से आगे ले जाकर एक व्यापक रचनात्मक व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करता है।
साहित्यिक यात्रा
रूचि बाजपेई शर्मा की साहित्यिक दुनिया भावनाओं, प्रकृति, मानवीय संबंधों और जीवन के अनुभवों से निर्मित दिखाई देती है।
उनकी रचनाओं के नामों में भी प्रकृति से गहरा जुड़ाव नज़र आता है। गुलमोहर, रजनीगंधा, सेमल और किंशुक जैसे शीर्षक उनकी रचनात्मक दृष्टि में रंग, ऋतु, प्रकृति और अनुभूतियों की उपस्थिति को रेखांकित करते हैं।
उनके लेखन में कविता प्रमुख विधा रही है, लेकिन उनकी रचनात्मक यात्रा कथा और उपन्यास लेखन की ओर भी विस्तार कर रही है।

प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ
‘गुलमोहर हो तुम’
‘गुलमोहर हो तुम’ रूचि बाजपेई शर्मा की साहित्यिक यात्रा की प्रमुख कृतियों में शामिल है।
गुलमोहर अपने तेजस्वी रंग और सौंदर्य के लिए जाना जाता है। इसी तरह यह शीर्षक भी भावनाओं, स्मृतियों और जीवन के रंगों से जुड़े एक संवेदनशील रचनात्मक संसार की ओर संकेत करता है।
‘रजनीगंधा’
‘रजनीगंधा’ उनकी साहित्यिक अभिव्यक्ति का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
रजनीगंधा की सुगंध की तरह इस शीर्षक में कोमलता, सौंदर्य और भावनात्मक गहराई का संकेत मिलता है। यह नाम उनकी साहित्यिक संवेदना और प्रकृति से जुड़े रचनात्मक दृष्टिकोण को भी सामने लाता है।
‘सेमल’
रूचि बाजपेई शर्मा की साहित्यिक यात्रा में ‘सेमल’ को विशेष महत्व प्राप्त है।
इस काव्य संग्रह को मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के श्री कृष्ण सरल सम्मान 2023–24 से सम्मानित किए जाने का उल्लेख मिलता है।
यह उपलब्धि उनके लेखन के लिए महत्वपूर्ण साहित्यिक मान्यता के रूप में देखी जाती है और उनके रचनात्मक जीवन में एक उल्लेखनीय पड़ाव का प्रतिनिधित्व करती है।
‘सेमल’ — रचनात्मक यात्रा का विशेष अध्याय
सेमल का वृक्ष अपने आकर्षक लाल फूलों और विशिष्ट प्राकृतिक उपस्थिति के लिए जाना जाता है। रूचि बाजपेई शर्मा की रचनात्मक दुनिया में प्रकृति से जुड़े प्रतीकों की लगातार उपस्थिति दिखाई देती है और ‘सेमल’ उसी संवेदनात्मक परंपरा का विस्तार प्रतीत होता है।
इस कृति से जुड़ा श्री कृष्ण सरल सम्मान 2023–24 उनके साहित्यिक कार्य को मिली उल्लेखनीय स्वीकृतियों में शामिल है।
यह उपलब्धि उनके लिए केवल किसी पुस्तक का सम्मान नहीं, बल्कि निरंतर साहित्य-साधना के प्रति प्राप्त मान्यता का प्रतीक भी मानी जा सकती है।

आगामी एवं प्रकाशनाधीन कृतियाँ
रूचि बाजपेई शर्मा का साहित्यिक लेखन निरंतर जारी है।
उनकी प्रकाशनाधीन कृतियों में निम्न नामों का उल्लेख किया गया है:
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किस्सों का बयाना — प्रथम
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किंशुक
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एक उपन्यास
ये आगामी कृतियाँ उनके साहित्यिक विस्तार का संकेत देती हैं। विशेष रूप से कथा और उपन्यास के क्षेत्र में सक्रियता यह दर्शाती है कि उनका रचनात्मक संसार कविता से आगे विभिन्न साहित्यिक विधाओं में विकसित हो रहा है।
‘कलम हस्ताक्षर’ — सम्पादन और साहित्यिक नेतृत्व
लेखन के साथ रूचि बाजपेई शर्मा की महत्वपूर्ण पहचान सम्पादन से भी जुड़ी है।
वे ‘कलम हस्ताक्षर’ मासिक हिन्दी साहित्य पत्रिका का सम्पूर्ण संचालन करती हैं।
एक साहित्यिक पत्रिका का संचालन स्वयं में एक व्यापक जिम्मेदारी है। इसमें रचनाओं का चयन, लेखकों से संवाद, साहित्यिक गुणवत्ता का ध्यान, सामग्री का संयोजन और पाठकों तक उसका प्रभावी प्रस्तुतिकरण जैसे अनेक पक्ष शामिल होते हैं।
इस भूमिका के माध्यम से उनका योगदान केवल व्यक्तिगत लेखन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे दूसरे रचनाकारों को भी अपनी अभिव्यक्ति के लिए मंच उपलब्ध कराने की प्रक्रिया से जुड़ती हैं।
नई साहित्यिक प्रतिभाओं को अवसर
सम्पादन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष नए और स्थापित दोनों प्रकार के रचनाकारों के बीच संवाद स्थापित करना है।
‘कलम हस्ताक्षर’ के माध्यम से रूचि बाजपेई शर्मा हिन्दी साहित्य की रचनात्मक परंपरा को आगे बढ़ाने और साहित्यकारों की रचनाओं को पाठकों के सामने प्रस्तुत करने से जुड़ी हैं।
इस प्रकार उनकी भूमिका एक लेखिका से आगे बढ़कर साहित्यिक समन्वयक और मंच-निर्माता के रूप में भी दिखाई देती है।
दूरदर्शन, आकाशवाणी और प्रिंट मीडिया से जुड़ाव
रूचि बाजपेई शर्मा की साहित्यिक रचनाओं और कविताओं को दूरदर्शन, आकाशवाणी और समाचार पत्रों के माध्यम से भी स्थान मिलने का उल्लेख है।
इस प्रकार उनके साहित्य की पहुँच पुस्तक और पत्रिका के पाठकों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि रेडियो, टेलीविजन और प्रिंट जैसे जनसंचार माध्यमों तक भी विस्तृत हुई।
यह बहु-माध्यमीय उपस्थिति उनकी साहित्यिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
चित्रकला की दुनिया — ‘रूचि आर्ट’
शब्दों के अलावा रंग भी रूचि बाजपेई शर्मा की अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
वे ‘रूचि आर्ट’ के नाम से चित्रकला के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं और उनके द्वारा सोलो एग्जिबिशन आयोजित किए जाने का भी उल्लेख है।
एक कवि जिस भाव को शब्दों में व्यक्त करता है, एक चित्रकार उसी अनुभूति को रंग, आकार, रेखा और संरचना के माध्यम से प्रस्तुत करता है।
रूचि जी के व्यक्तित्व में इन दोनों कलात्मक माध्यमों का मेल उनकी रचनात्मकता को और अधिक व्यापक बनाता है।
ऑनलाइन कला प्रदर्शनी और कला समीक्षा
उनकी चित्रकला यात्रा में बिहार में आयोजित ऑनलाइन एग्जिबिशन का भी उल्लेख किया गया है।
इसके अतिरिक्त उनकी कलाकृतियों से संबंधित समीक्षाएँ समाचार पत्रों में प्रकाशित होने की जानकारी भी दी गई है।
लंदन लेखनी ब्लॉग से जुड़ी उनकी रचनात्मक उपस्थिति ने उनके साहित्य और कला को डिजिटल तथा अंतरराष्ट्रीय पाठक-वर्ग से जोड़ने में भी भूमिका निभाई।
चित्रकला से जुड़े सम्मान
चित्रकला के क्षेत्र में उनके नाम से जुड़े उल्लेखनीय सम्मानों में शामिल हैं:
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एम. एफ. हुसैन चित्रकार अंतर्राष्ट्रीय सम्मान
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वेन गॉग चित्रकार सम्मान
ये सम्मान उनके साहित्यिक व्यक्तित्व के साथ-साथ दृश्य कला में उनकी सक्रियता को भी रेखांकित करते हैं।
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक सम्मान
रूचि बाजपेई शर्मा की रचनात्मक यात्रा के साथ अनेक सम्मान और उपलब्धियाँ जुड़ी बताई गई हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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श्री कृष्ण सरल सम्मान 2023–24 — ‘सेमल’ के लिए
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लंदन बुक ऑफ अवार्ड 2023
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कवि कुम्भ सम्मान
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महिला गौरव सम्मान
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सुभद्रा कुमारी चौहान मध्य प्रदेश सम्मान
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रविन्द्र नाथ टैगोर सम्मान
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एम. एफ. हुसैन चित्रकार अंतर्राष्ट्रीय सम्मान
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वेन गॉग चित्रकार सम्मान
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मध्य प्रदेश की प्रतिभावान महिलाओं की सूची में स्थान
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Mrs. India Perfectionist 2021
इन विभिन्न सम्मानों की प्रकृति भी उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाती है—कुछ साहित्य से जुड़े हैं, कुछ कला से और कुछ सार्वजनिक व्यक्तित्व एवं उपलब्धियों से।
London Book of Award 2023
London Book of Award 2023 को उनकी उल्लेखित अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक उपलब्धियों में स्थान दिया गया है।
यह उपलब्धि उनकी रचनात्मक पहचान के व्यापक दायरे को सामने लाती है और यह दर्शाती है कि उनकी साहित्यिक गतिविधियाँ केवल स्थानीय अथवा क्षेत्रीय मंच तक सीमित नहीं रहीं।
खंडवा से सक्रिय एक रचनाकार का अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संदर्भों तक पहुँचना उनकी यात्रा का उल्लेखनीय पक्ष है।
मध्य प्रदेश की प्रतिभावान महिलाओं में पहचान
रूचि बाजपेई शर्मा का नाम मध्य प्रदेश की प्रतिभावान महिलाओं से जुड़ी सूची में शामिल किए जाने का भी उल्लेख मिलता है।
यह पहचान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका योगदान किसी एक क्षेत्र में सीमित नहीं है।
साहित्य, चित्रकला, खेल, सम्पादन और प्रकाशन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रियता उनके व्यक्तित्व की व्यापकता को स्थापित करती है।
Mrs. India Perfectionist 2021
वर्ष 2021 में Mrs. India Perfectionist की उपलब्धि उनके जीवन के एक अलग आयाम का प्रतिनिधित्व करती है।
साहित्य और कला की दुनिया के साथ-साथ सार्वजनिक प्रस्तुति, आत्मविश्वास और बहुमुखी प्रतिभा से जुड़ी यह उपलब्धि उनके व्यक्तित्व के विविध स्वरूप को और मजबूत करती है।
खेल की दुनिया — एथलीट और धावक
रूचि बाजपेई शर्मा की पहचान केवल लेखिका और कलाकार के रूप में नहीं है। वे एथलीट और धावक भी रही हैं।
उनकी खेल यात्रा में स्टेट लेवल सहभागिता तथा वर्ष 2021 में 10 किलोमीटर मैराथन पूरा करने की उपलब्धि का उल्लेख किया गया है।
साहित्य और चित्रकला मानसिक सृजनात्मकता की मांग करते हैं, जबकि लंबी दूरी की दौड़ शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और निरंतर अभ्यास की परीक्षा होती है।
इन दोनों प्रकार के अनुशासन का एक ही व्यक्तित्व में होना उनकी बहुआयामी जीवनशैली को दर्शाता है।
10 किलोमीटर मैराथन — दृढ़ता का प्रतीक
वर्ष 2021 में 10 किलोमीटर मैराथन पूरा करना उनकी खेल उपलब्धियों में उल्लेखनीय है।
लंबी दूरी की दौड़ केवल गति से नहीं जीती जाती। इसके लिए निरंतर तैयारी, सहनशक्ति, मानसिक एकाग्रता और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक होती है।
यही गुण साहित्यिक रचना और चित्रकला की लंबी प्रक्रिया में भी समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
इस प्रकार खेल उनके जीवन में केवल फिटनेस का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन और निरंतरता की जीवन-दृष्टि का हिस्सा बनता है।
खेल, कला और साहित्य का साझा अनुशासन
एक लेखक को शब्दों पर धैर्य चाहिए।
एक चित्रकार को रंगों पर नियंत्रण और एकाग्रता चाहिए।
एक धावक को अपने शरीर और मन दोनों पर अनुशासन चाहिए।
रूचि बाजपेई शर्मा की यात्रा इन तीनों गुणों को एक साथ सामने लाती है।
यही कारण है कि उनके लिए साहित्य, चित्रकला और दौड़ तीन अलग-अलग गतिविधियाँ नहीं दिखाई देतीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति और आत्म-विकास की परस्पर जुड़ी हुई दिशाएँ प्रतीत होती हैं।
प्रकृति और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता
रूचि बाजपेई शर्मा स्वयं को प्रकृति और पशु प्रेमी के रूप में भी प्रस्तुत करती हैं।
प्रकृति के प्रति उनका यह जुड़ाव उनकी साहित्यिक कृतियों के शीर्षकों में भी सहज रूप से दिखाई देता है।
गुलमोहर, रजनीगंधा, सेमल और किंशुक जैसे नाम उनके रचनात्मक संसार को प्रकृति के रंगों, फूलों और सौंदर्य से जोड़ते हैं।
प्रकृति और जीव-जगत के प्रति यह संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व में मानवीयता और भावात्मक गहराई का एक और आयाम जोड़ती है।
लगभग तीन दशकों का एकाउंटिंग अनुभव
रूचि बाजपेई शर्मा की व्यावसायिक यात्रा का एक विशेष पहलू उनका लगभग तीस वर्षों का एकाउंटिंग अनुभव है।
यह तथ्य उनके व्यक्तित्व की एक अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है।
एकाउंटिंग का क्षेत्र सटीकता, अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यवस्थापन की मांग करता है, जबकि साहित्य और कला कल्पना, संवेदना और सृजनात्मक स्वतंत्रता से जुड़े हैं।
इन दोनों बिल्कुल अलग प्रकृतियों के क्षेत्रों में लंबे समय तक सक्रिय रहना उनके व्यक्तित्व में व्यावहारिकता और रचनात्मकता के अनूठे संतुलन को दर्शाता है।
रूचि पब्लिकेशन — प्रकाशन क्षेत्र में भूमिका
रूचि बाजपेई शर्मा रूचि पब्लिकेशन की डायरेक्टर के रूप में भी कार्यरत हैं।
इस जिम्मेदारी के माध्यम से वे साहित्य को लिखने और सम्पादित करने के साथ-साथ उसे प्रकाशन के रूप में पाठकों तक पहुँचाने की प्रक्रिया से भी जुड़ती हैं।
इस प्रकार उनकी भूमिका तीन स्तरों पर दिखाई देती है:
रचना करना, सम्पादन करना और प्रकाशन को दिशा देना।
यही व्यापक सहभागिता उन्हें साहित्यिक क्षेत्र में बहुआयामी भूमिका प्रदान करती है।
फिल्म राइटिंग एसोसिएशन, मुंबई से जुड़ाव
रूचि बाजपेई शर्मा फिल्म राइटिंग एसोसिएशन, मुंबई की सदस्य भी बताई जाती हैं।
यह सदस्यता उनके लेखन की संभावनाओं को साहित्यिक पुस्तकों और कविताओं से आगे फिल्म तथा दृश्य माध्यमों की रचनात्मक दुनिया से जोड़ती है।
उनकी साहित्यिक संवेदना, कथा-रुचि और चित्रकला से जुड़ाव को देखते हुए फिल्म लेखन का क्षेत्र उनकी बहुआयामी रचनात्मकता का स्वाभाविक विस्तार माना जा सकता है।
स्थानीय जड़ों से व्यापक रचनात्मक उपस्थिति तक
खंडवा, मध्य प्रदेश से जुड़ी उनकी जीवन यात्रा ने विभिन्न माध्यमों और मंचों के जरिए व्यापक पहचान की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
पुस्तकें, साहित्यिक पत्रिका, समाचार पत्र, दूरदर्शन, आकाशवाणी, कला प्रदर्शनी, डिजिटल ब्लॉग, प्रकाशन और साहित्यिक-सांस्कृतिक सम्मान—ये सभी उनके रचनात्मक सफर के अलग-अलग पड़ाव हैं।
उनकी यात्रा यह दिखाती है कि किसी बड़े महानगर में रहना ही व्यापक पहचान के लिए आवश्यक नहीं है। निरंतर रचना और मंचों से जुड़ाव किसी भी स्थान से व्यक्ति को व्यापक पाठक और दर्शक वर्ग तक पहुँचा सकता है।
प्रेरक महिला व्यक्तित्व
रूचि बाजपेई शर्मा की यात्रा विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है जो व्यावसायिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी रचनात्मक इच्छाओं को पीछे छोड़ देती हैं।
लगभग तीन दशकों के एकाउंटिंग अनुभव के साथ साहित्य, कला, प्रकाशन और खेल जैसी गतिविधियों को जारी रखना इस बात का उदाहरण है कि रचनात्मक जीवन के लिए किसी निश्चित आयु या पेशे की सीमा आवश्यक नहीं होती।
इच्छाशक्ति और निरंतरता के साथ व्यक्ति अपने जीवन में नए अध्याय जोड़ सकता है।
एक जीवन में कई पहचान
रूचि बाजपेई शर्मा को किसी एक पदनाम में समेटना आसान नहीं है।
वे—
लेखिका
कविता, कथा और उपन्यास की दिशा में सक्रिय रचनाकार।
सम्पादक
‘कलम हस्ताक्षर’ मासिक हिन्दी साहित्य पत्रिका के संचालन से जुड़ी साहित्यिक व्यक्तित्व।
चित्रकार
‘रूचि आर्ट’ के माध्यम से चित्रकला और कला प्रदर्शनी से सक्रिय रूप से जुड़ी कलाकार।
धावक एवं एथलीट
स्टेट लेवल सहभागिता और 10 किलोमीटर मैराथन से जुड़ी खेल प्रेमी।
प्रकाशन निदेशक
रूचि पब्लिकेशन की डायरेक्टर के रूप में साहित्यिक प्रकाशन गतिविधियों से जुड़ीं।
प्रकृति एवं पशु प्रेमी
प्रकृति और जीव-जगत के प्रति संवेदनशील रचनात्मक व्यक्तित्व।
उनकी रचनात्मक पहचान के चार आधार
रूचि बाजपेई शर्मा की संपूर्ण यात्रा को चार शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है:
सृजन
साहित्य और चित्रकला के माध्यम से निरंतर अभिव्यक्ति।
संवेदना
मानवीय भावनाओं, प्रकृति और जीव-जगत से जुड़ाव।
अनुशासन
व्यावसायिक जीवन और खेल दोनों में निरंतरता।
समर्पण
लेखन, सम्पादन, कला और प्रकाशन को लंबे समय तक आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता।
मुख्य साहित्यिक कृतियाँ
प्रकाशित
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गुलमोहर हो तुम
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रजनीगंधा
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सेमल
प्रकाशनाधीन
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किस्सों का बयाना — प्रथम
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किंशुक
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एक उपन्यास
मुख्य व्यावसायिक एवं रचनात्मक भूमिकाएँ
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लेखिका एवं कवयित्री
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सम्पादक
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चित्रकार
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एथलीट एवं धावक
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डायरेक्टर — रूचि पब्लिकेशन
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संचालक — कलम हस्ताक्षर मासिक हिन्दी साहित्य पत्रिका
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कला गतिविधियाँ — रूचि आर्ट
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सदस्य — फिल्म राइटिंग एसोसिएशन, मुंबई
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लगभग 30 वर्षों का एकाउंटिंग अनुभव
खेल उपलब्धियाँ
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एथलीट के रूप में सक्रियता
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स्टेट लेवल सहभागिता
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10 किलोमीटर मैराथन — 2021
प्रमुख सम्मान एवं पहचान
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श्री कृष्ण सरल सम्मान 2023–24
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London Book of Award 2023
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कवि कुम्भ सम्मान
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महिला गौरव सम्मान
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सुभद्रा कुमारी चौहान मध्य प्रदेश सम्मान
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रविन्द्र नाथ टैगोर सम्मान
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एम. एफ. हुसैन चित्रकार अंतर्राष्ट्रीय सम्मान
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वेन गॉग चित्रकार सम्मान
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मध्य प्रदेश की प्रतिभावान महिलाओं में स्थान
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Mrs. India Perfectionist 2021
मीडिया एवं रचनात्मक उपस्थिति
उनकी साहित्यिक एवं कलात्मक गतिविधियों से जुड़े प्रमुख माध्यमों में उल्लेखित हैं:
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दूरदर्शन
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आकाशवाणी
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समाचार पत्र
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साहित्यिक पत्रिकाएँ
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ऑनलाइन कला प्रदर्शनी
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कला समीक्षाएँ
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लंदन लेखनी ब्लॉग
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साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच
व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक परिचय
नाम: रूचि बाजपेई शर्मा
निवास: खंडवा, मध्य प्रदेश
मुख्य पहचान: लेखिका, सम्पादक, चित्रकार, एथलीट, धावक एवं प्रकाशन निदेशक
प्रकाशन संस्थान: रूचि पब्लिकेशन
साहित्यिक पत्रिका: कलम हस्ताक्षर
कला मंच: रूचि आर्ट
विशेष रुचियाँ: साहित्य, चित्रकला, खेल, प्रकृति एवं पशु प्रेम
संपर्क
रूचि बाजपेई शर्मा
खंडवा, मध्य प्रदेश
मोबाइल: 9425951270
ईमेल: tilotma21@gmail.com
निष्कर्ष — शब्द, रंग और संकल्प की यात्रा
रूचि बाजपेई शर्मा की जीवन यात्रा इस विचार को मजबूत करती है कि रचनात्मकता को किसी एक पहचान में बाँधना आवश्यक नहीं है।
एक ही व्यक्ति साहित्य में कविता रच सकता है, कैनवास पर चित्र बना सकता है, साहित्यिक पत्रिका का संचालन कर सकता है, प्रकाशन संस्थान संभाल सकता है और उसी ऊर्जा के साथ लंबी दूरी की दौड़ भी पूरी कर सकता है।
उनके जीवन में कलम विचारों को स्वर देती है, रंग भावनाओं को दृश्य रूप देते हैं और दौड़ उनके अनुशासन तथा दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देती है।
खंडवा से शुरू हुई यह बहुआयामी यात्रा साहित्य, कला, मीडिया, प्रकाशन, खेल और विभिन्न सांस्कृतिक मंचों तक विस्तृत हुई है।
रूचि बाजपेई शर्मा का व्यक्तित्व इसी विचार का प्रतिनिधित्व करता है कि—
“सच्ची रचनात्मकता किसी एक दिशा में नहीं चलती; वह शब्दों में लिखती है, रंगों में खिलती है, कदमों के साथ आगे बढ़ती है और अपने पीछे एक विशिष्ट पहचान छोड़ती जाती है।”