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Sada-e-Labbaik – Hajj Safarnama by M. A. Kamal

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Sada-e-Labbaik – Hajj Safarnama by M. A. Kamal
Sada-e-Labbaik – Hajj Safarnama by M. A. Kamal
Main Name Sada-e-Labbaik
Full Name Sada-e-Labbaik – Hajj Safarnama by M. A. Kamal
Profile / Page Title Sada-e-Labbaik
Subtitle Hindi & Urdu Hajj Safarnama by M. A. Kamal
Author M. A. Kamal
Short Google Description Sada-e-Labbaik is a Hajj travelogue by M. A. Kamal, documenting his 2025 Hajj journey, spiritual reflections and practical experiences in Hindi and Urdu.

SADA-E-LABBAIK

A Hajj Travelogue by M. A. Kamal

हज सफरनामा | रूहानी अनुभव | आत्ममंथन | इंसानी जिम्मेदारी

“यह केवल हज की यात्रा का विवरण नहीं, बल्कि उस सफर में महसूस हुई रूहानियत, बेचैनी, दुआ, उम्मीद और इंसानी जिम्मेदारी को शब्द देने की कोशिश है।”


परिचय

Sada-e-Labbaik (सदा-ए-लब्बैक) लेखक M. A. Kamal, अर्थात Mohammed Arshad Kamal, द्वारा लिखित एक हज सफरनामा है, जो उनके 2025 के हज अनुभवों पर आधारित है।

यह पुस्तक केवल मक्का, मदीना, मीना, मुज़दलिफ़ा और अराफ़ात की यात्रा का क्रमवार विवरण नहीं है। लेखक ने इसे अपने रूहानी अनुभवों, व्यक्तिगत भावनाओं, आत्ममंथन और हज के दौरान महसूस की गई सामाजिक एवं मानवीय जिम्मेदारियों का दस्तावेज बनाया है।

पुस्तक के आधिकारिक प्रकाशन विवरण में इसका नाम Sada-e-Labbaik, लेखक M. A. Kamal, प्रकाशन वर्ष March 2026, कुल 96 पृष्ठ, मूल्य ₹100 और ISBN 978-93-5782-353-1 दर्ज है।


Official PDF Editions

Sada-e-Labbaik — All Official & Reading Links

 

Read Sada-e-Labbaik Online

Hindi Edition: Read Full Hindi PDF
Urdu Edition: Read Full Urdu PDF
Official ISBN: View ISBN Certificate
Pothi Hindi: Read / Buy Hindi Edition
Pothi Urdu: Read / Buy Urdu Edition
Internet Archive: View on Internet Archive
AIHWC: View Books on AIHWC

 


Book Identity

Book Name: Sada-e-Labbaik
Hindi Title: सदा-ए-लब्बैक
Genre: Hajj Travelogue / Spiritual Travel Writing
Author: M. A. Kamal
Official Name: Mohammed Arshad Kamal
Publication Year: 2026
ISBN: 978-93-5782-353-1

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत Raja Rammohun Roy National Agency for ISBN के acknowledgement में यही ISBN पुस्तक “सदा ए लब्बैक” के लिए जारी किया गया है और लेखक के रूप में Mohammed Arshad Kamal दर्ज हैं।


एक सफर, जो केवल दूरी का नहीं था

हज लाखों लोगों के लिए इबादत का एक महान सफर है, लेकिन Sada-e-Labbaik में M. A. Kamal इसे अपने भीतर की यात्रा के रूप में भी देखते हैं।

लेखक के लिए यह सफर केवल एक शहर से दूसरे शहर तक जाने का नाम नहीं था। इसमें घर से विदाई की भावनाएँ थीं, मदीना की पहली हाज़िरी की बेचैनी थी, काबा की पहली झलक का असर था, तवाफ की थकान में मिलने वाला सुकून था, मीना की भीड़ थी, मुज़दलिफ़ा की रात थी और मैदान-ए-अराफ़ात में खड़े होकर की गई दुआओं की गहराई थी।

पुस्तक में लेखक 28 अप्रैल को मदीना के लिए यात्रा शुरू होने का वर्णन करते हुए इस सफर को अपनी “रूह के केंद्र” की ओर जाने वाली यात्रा के रूप में प्रस्तुत करते हैं।


लेखक की अपनी बात

M. A. Kamal स्वयं अपनी पुस्तक को किसी जटिल धार्मिक या फ़िक़्ही ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत नहीं करते।

उनका उद्देश्य अपने अनुभव, अपनी भावनाएँ और यात्रा से मिली सीख पाठकों तक पहुँचाना है।

पुस्तक के शुरुआती भाग में लेखक स्पष्ट करते हैं कि यह सफरनामा मुख्य रूप से एक हज यात्री की भावनाओं और रूहानी अवस्था का प्रतिबिंब है। धार्मिक नियमों की गहरी व्याख्या के लिए वे पाठकों को मान्य विद्वानों और प्रमाणित धार्मिक पुस्तकों की ओर जाने की सलाह देते हैं।

यही ईमानदार दृष्टिकोण Sada-e-Labbaik को व्यक्तिगत, सहज और अनुभव-आधारित बनाता है।


पुस्तक का उद्देश्य

इस पुस्तक को लिखने के पीछे लेखक के दो प्रमुख उद्देश्य दिखाई देते हैं।

पहला, हज के दौरान अपने दिल और रूह पर पड़े प्रभाव को शब्दों में संजोना।

दूसरा, भविष्य में हज पर जाने वाले यात्रियों को उन कठिनाइयों, व्यवस्थाओं और व्यावहारिक परिस्थितियों से परिचित कराना जिनका सामना लेखक ने स्वयं किया।

लेखक बताते हैं कि यदि उनके अनुभव से किसी भविष्य के हाजी की यात्रा आसान हो सके, तो वे अपने लेखन को सार्थक मानेंगे।


मदीना की हाज़िरी

पुस्तक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मदीना मुनव्वरा की यात्रा से संबंधित है।

लेखक ने मस्जिद-ए-नबवी की हाज़िरी, रूहानी अनुभूति और मदीना से जुड़ी विभिन्न ज़ियारतों का वर्णन किया है।

इनमें शामिल हैं:

Jannat-ul-Baqi, Masjid-e-Ghamama, Masjid-e-Ijaba, Masjid-e-Quba, Uhud, Masjid-e-Jumu'ah और Sab'a Masajid जैसे स्थान।

इन स्थलों का उल्लेख केवल पर्यटन-स्थल की तरह नहीं किया गया, बल्कि लेखक उन्हें इतिहास, आस्था और व्यक्तिगत भावनाओं के साथ जोड़ते हैं।


काबा की पहली झलक

Sada-e-Labbaik का सबसे भावनात्मक भाग उन क्षणों से जुड़ा है जब लेखक पहली बार Baitullah को देखते हैं।

पुस्तक की विषय-सूची में:

“Baitullah ki Pehli Jhalak – Deewangi aur Ruhaniyat”

के अंतर्गत तवाफ, सई, काबा शरीफ के महत्वपूर्ण हिस्सों और हज़रत हाजरा से जुड़ी सई की परंपरा का वर्णन शामिल है।

यह भाग पुस्तक को केवल यात्रा-वर्णन नहीं रहने देता, बल्कि इसे एक गहरे रूहानी संस्मरण का रूप देता है।


मक्का की ज़ियारतें

लेखक ने मक्का मुकर्रमा के कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भी उल्लेख किया है।

पुस्तक में:

Jabal-e-Noor और Ghar-e-Hira, Jabal-e-Thawr, Mount Arafat, Mina, Muzdalifah, Jannat-ul-Mu'alla और Mawlid-un-Nabi जैसे स्थानों का विवरण दिया गया है।

इन अध्यायों में इतिहास के साथ यात्रा संबंधी practical observations भी मिलते हैं।


एक Practical Hajj Guide भी

पुस्तक की एक खास बात यह है कि इसमें केवल भावनाएँ नहीं हैं।

लेखक ने कई स्थानों पर हज यात्रियों के लिए practical guidance देने की कोशिश की है।

यात्रा के दौरान परिवहन, किराया, प्रमुख ज़ियारतों तक पहुँचने के तरीके और विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़े अनुभवों को भी पुस्तक में स्थान दिया गया है।

Hindi edition के पृष्ठों में भी मक्का की ज़ियारतों के साथ Practical Guide के रूप में स्थानीय बस, किराया और shared taxi जैसे बिंदु शामिल दिखाई देते हैं।


मीना – हज का महत्वपूर्ण पड़ाव

पुस्तक में मीना को केवल एक पड़ाव नहीं माना गया।

लेखक ने वहाँ के टेंट, भीड़, इबादत, धैर्य और व्यवस्था से जुड़े अपने अनुभव लिखे हैं।

विषय-सूची में पूरा भाग:

“Asal Safar-e-Hajj – Mina ki Rawangi”

के अंतर्गत दिया गया है।

इसमें मीना की टेंट सिटी, मस्जिद-ए-खैफ और अराफ़ात की ओर प्रस्थान तक का विवरण शामिल है।


मैदान-ए-अराफ़ात

हज यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ाव मैदान-ए-अराफ़ात पुस्तक में विशेष स्थान रखता है।

लेखक इसे दुआ, आत्ममंथन और इंसानी संवेदना का क्षण बनाते हैं।

पुस्तक में अराफ़ात से जुड़े अध्याय में:

Masjid-e-Nimrah, अराफ़ात की दोपहर, ख़ुतबा, दुआ और मुज़दलिफ़ा की ओर रवाना होने जैसी अवस्थाओं का वर्णन है।


रूहानियत के साथ सामाजिक संवेदना

Sada-e-Labbaik की पहचान केवल धार्मिक यात्रा-वृत्तांत होना नहीं है।

लेखक कई स्थानों पर दुनिया में पीड़ित लोगों के प्रति अपनी चिंता और संवेदना व्यक्त करते हैं।

विशेष रूप से वे फ़िलिस्तीन और ग़ज़ा के लोगों के प्रति अपनी भावनाएँ पुस्तक में दर्ज करते हैं। यह पुस्तक में व्यक्त लेखक का निजी दृष्टिकोण और मानवीय चिंता है।

लेखक अपने हज को केवल व्यक्तिगत इबादत के रूप में नहीं देखते, बल्कि इसे व्यापक मुस्लिम समुदाय की एकता और मानवीय जिम्मेदारी से जोड़ते हैं।


हुकूक-उल-इबाद का संदेश

इस पुस्तक की विचारधारा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि आध्यात्मिकता केवल इबादत तक सीमित नहीं हो सकती।

लेखक के अनुसार इंसान को दूसरों के अधिकारों के प्रति भी ईमानदार रहना चाहिए।

इस दृष्टि में:

इंसाफ, विरासत में न्याय, व्यापार में ईमानदारी, गरीबों और पड़ोसियों के अधिकार और इंसानी संबंधों में जिम्मेदारी

जैसे विषय महत्वपूर्ण बन जाते हैं।

इसी कारण पुस्तक के शुरुआती अध्यायों में गरीबों, पड़ोसियों, समानता और इंसानी व्यवहार से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया है।


मुज़दलिफ़ा की रात

अराफ़ात के बाद मुज़दलिफ़ा की यात्रा पुस्तक के सबसे शांत और रूहानी हिस्सों में से एक है।

विषय-सूची में:

“Muzdalifah ki Muqaddas Raat – Khule Aasmaan ke Neeche”

जैसा अध्याय शामिल है।

यहाँ लेखक हज यात्रा के बाहरी संघर्ष के बीच मिलने वाले आंतरिक सुकून को महसूस करते हैं।


जमरात और हज की पूर्णता

पुस्तक आगे बढ़ते हुए जमरात, मीना वापसी और हज की पूर्णता तक पहुँचती है।

जमरात से संबंधित अध्याय को:

“Safed Libaas, Safed Ummeedein”

जैसे भावनात्मक शीर्षक से रखा गया है।

इसके बाद तवाफ-ए-ज़ियारत, मस्जिद-ए-खैफ में इबादत और हज की पूर्णता से संबंधित अध्याय आते हैं।


विदाई की घड़ियाँ

हर हज सफर की तरह इस पुस्तक में भी सबसे कठिन क्षण विदाई के हैं।

लेखक ने मक्का और मदीना को छोड़ते समय पैदा होने वाली भावनाओं को भी स्थान दिया है।

विषय-सूची में:

“Wida ki Ghadiyan aur Mud-Mud Kar Dekhta Hua Dil”

नाम से एक अलग अध्याय रखा गया है।

यह शीर्षक ही पुस्तक के भावनात्मक स्वर को काफी हद तक व्यक्त करता है।


किताब के अंतिम विचार

पुस्तक के अंतिम हिस्से केवल यात्रा समाप्त होने पर खत्म नहीं होते।

लेखक वहाँ कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हैं:

इबादत की असली रूह क्या है?

क्या हज केवल रस्म है या जीवन बदलने वाला अनुभव?

यात्रा के दौरान सामान अधिक महत्वपूर्ण है या आध्यात्मिक तैयारी?

पुस्तक की विषय-सूची के अंतिम अध्यायों में “कुछ मशवरे”, “इबादत की रूह”, “हज: इबादत या गुनाहों पर पर्दा?” और “एक आखिरी बात” जैसे विषय शामिल हैं।


Publication & Authentication

Sada-e-Labbaik के लिए भारत की आधिकारिक ISBN Agency ने:

ISBN: 978-93-5782-353-1

जारी किया है।

Official acknowledgement में:

Publisher Name: Mohammed Arshad Kamal
Book Title: सदा ए लब्बैक
Author: Mohammed Arshad Kamal
Language: Hindi
Publication Year: 2026

दर्ज है।


Hindi & Urdu Editions

इस पुस्तक की सामग्री Hindi और Urdu, दोनों संस्करणों में उपलब्ध है।

Hindi संस्करण के cover पर “सदा-ए-लब्बैक” और लेखक का नाम M. A. Kamal स्पष्ट रूप से प्रकाशित है।

Urdu edition के official publication page पर भी पुस्तक का नाम, लेखक, प्रकाशन वर्ष, मूल्य और ISBN दिया गया है।


Media Review

पुस्तक को लेकर साझा की गई newspaper clipping में “Aag Review” शीर्षक के अंतर्गत एक विस्तृत Urdu review प्रकाशित दिखाई देता है।

इस clipping पर तारीख:

Wednesday, 13 May 2026

दिखाई देती है।

यह review पुस्तक को मिले शुरुआती साहित्यिक और पाठकीय ध्यान का एक दस्तावेज है।


Writer – M. A. Kamal

M. A. Kamal ने स्वयं को पारंपरिक पेशेवर लेखक के रूप में स्थापित करने से पहले जीवन के एक असाधारण अनुभव को अपनी कलम का आधार बनाया।

उनकी लेखकीय पहचान की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे घटनाओं को केवल बताते नहीं, बल्कि उनके भीतर पैदा हुई भावनाओं को भी पाठक तक पहुँचाने की कोशिश करते हैं।

उनका लेखन:

सादा, अनुभव-आधारित, आत्ममंथनपूर्ण और भावनात्मक है।


क्यों पढ़ें Sada-e-Labbaik?

Sada-e-Labbaik उन पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है जो हज के बारे में केवल धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक आम हाजी की नज़र से उसका अनुभव समझना चाहते हैं।

यह पुस्तक पाठक को:

  • हज यात्रा की वास्तविक भावनाओं से परिचित कराती है।

  • मदीना और मक्का की प्रमुख ज़ियारतों से परिचय कराती है।

  • हज यात्रा की व्यावहारिक चुनौतियों को सामने लाती है।

  • इबादत के साथ इंसानी जिम्मेदारी पर सोचने के लिए प्रेरित करती है।

  • लेखक के निजी आध्यात्मिक अनुभवों से जोड़ती है।


Quick Book Profile

Title: Sada-e-Labbaik
Hindi: सदा-ए-लब्बैक
Author: M. A. Kamal
Official Author Name: Mohammed Arshad Kamal
Category: Hajj Travelogue
Primary Theme: Hajj, Spirituality, Reflection & Humanity
Year: 2026
ISBN: 978-93-5782-353-1
Languages: Hindi & Urdu
Urdu Edition Pages: 96
Original Listed Price: ₹100


 

## Read The Book

### 📘 Hindi Full Edition
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### 📕 Urdu Full Edition
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### 📜 Official ISBN Proof
[**Click Here to View Official ISBN PDF**](GOOGLE-DRIVE-ISBN-LINK)

 

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