Sunil Baudh (सुनील बौद्ध)
सामाजिक कार्यकर्ता | बौद्ध धम्म प्रचारक | संगठनात्मक नेतृत्वकर्ता | उद्यमी | बौद्ध समुदाय के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के लिए सक्रिय प्रतिनिधि
परिचय
सुनील बौद्ध (Sunil Baudh), जिन्हें पूर्व में सुनील कुमार के नाम से भी जाना जाता है, दिल्ली के एक सामाजिक कार्यकर्ता, बौद्ध धम्म के अनुयायी, संगठनात्मक पदाधिकारी एवं उद्यमी हैं। वे वर्ष 2013 से डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के सामाजिक न्याय, समानता, बंधुत्व तथा संवैधानिक अधिकारों पर आधारित विचारों से प्रेरित होकर सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय हैं।
उनका कार्य मुख्यतः भारतीय बौद्ध समुदाय के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं कानूनी अधिकारों के संरक्षण, ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों के पुनरुद्धार, सामाजिक न्याय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों के कल्याण तथा बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार पर केंद्रित रहा है।
सुनील बौद्ध सितंबर 2016 से The Buddhist Society of India (भारतीय बौद्ध महासभा) से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2025 में उन्हें संगठन में दिल्ली ट्रस्टी एवं उत्तर भारत प्रभारी की जिम्मेदारी प्राप्त हुई। वे वर्ष 2018 से All India Action Committee for Buddhist Personal Law में सक्रिय रहे हैं तथा वर्ष 2022 से राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कार्यरत हैं।
इसके अतिरिक्त वे Ashoka Raj Foundation तथा Live Lord Buddha Foundation के संस्थापक हैं। व्यावसायिक क्षेत्र में वे Delhi Digital Solution Private Limited तथा साझेदारी में संचालित Disha Path Lab & Clinic से जुड़े हैं।
उनके जीवन की विशेषता आर्थिक संघर्षों, पारिवारिक जिम्मेदारियों, अनेक व्यवसायों में उतार-चढ़ाव तथा सामाजिक कार्यों के बीच निरंतर सक्रिय बने रहने का प्रयास रही है।
व्यक्तिगत विवरण
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विवरण |
जानकारी |
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पूरा नाम |
Sunil Baudh (सुनील बौद्ध) |
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पूर्व नाम |
सुनील कुमार |
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वास्तविक जन्मतिथि |
30 सितंबर 1984 |
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सरकारी अभिलेखों में जन्मतिथि |
1 मार्च 1984 |
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जन्मस्थान |
धीरपुर गाँव, उत्तरी दिल्ली |
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पिता |
स्वर्गीय श्री दरियाव सिंह |
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माता |
स्वर्गीय श्रीमती धनपति देवी |
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जीवनसाथी |
श्रीमती ललिता |
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विवाह |
18 अप्रैल 2006 |
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संतान |
इंद्राक्षी, तनिशा एवं वंशिका |
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शैक्षणिक योग्यता |
बी.ए. प्रोग्राम, दिल्ली विश्वविद्यालय (SOL) |
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धार्मिक आस्था |
बौद्ध धम्म (2017 से) |
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निवास |
धीरपुर गाँव, दिल्ली – 110009 |
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प्रमुख कार्यक्षेत्र |
सामाजिक न्याय, बौद्ध अधिकार, ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण एवं व्यवसाय |
पारिवारिक पृष्ठभूमि और पिता का संघर्षपूर्ण जीवन
सुनील बौद्ध की पारिवारिक पृष्ठभूमि हरियाणा के बजाना गाँव से जुड़ी हुई है। उनके पिता स्वर्गीय श्री दरियाव सिंह का जन्म लगभग 1940–1942 के दौरान एक साधारण अनुसूचित जाति परिवार में हुआ था।
उनके दादा श्री बनवारी लाल पारंपरिक जूती निर्माण के कुशल कारीगर थे। उस समय परिवार के पास खेती के लिए कोई भूमि नहीं थी और परिवार का जीवनयापन जूती बनाने के व्यवसाय पर निर्भर था। परिवार एक छोटे से मिट्टी और लकड़ी से बने मकान में रहता था।
इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्री दरियाव सिंह ने गाँव के सरकारी विद्यालय से दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की। पारिवारिक विवरण के अनुसार, उस समय वे गाँव के उन अत्यंत सीमित लोगों में थे जिन्होंने दसवीं तक शिक्षा प्राप्त की थी।
कम आयु में विवाह और बढ़ती पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। उन्होंने अपने पिता से अलग स्थान पर जूती निर्माण का कार्य प्रारंभ किया।
लगभग वर्ष 1960 में गाँव के एक परिचित व्यक्ति के प्रोत्साहन पर वे बेहतर रोजगार की तलाश में दिल्ली आए। दिल्ली में शुरुआती वर्षों में उन्होंने कई प्रकार के छोटे-मोटे कार्य किए और अनेक कठिनाइयों का सामना किया।
काफी संघर्ष के बाद उन्हें दिल्ली सरकार के लोक नायक जय प्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल से जुड़े चिकित्सा संस्थान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में सरकारी सेवा प्राप्त हुई।
उन्होंने वर्षों तक सरकारी सेवा के साथ परिवार और रिश्तेदारों की जिम्मेदारियाँ निभाईं। अपने छोटे भाई को गाँव से दिल्ली लाकर शिक्षा दिलाई, नौकरी मिलने तक उनका खर्च उठाया तथा अपनी दो बहनों और चारों बच्चों के विवाह सहित अनेक पारिवारिक दायित्व पूरे किए।
वर्ष 2001 में वे दिल्ली गेट स्थित गुरु नानक आई सेंटर से सेवानिवृत्त हुए।
धीरपुर स्थित पैतृक घर और आर्थिक चुनौतियाँ
दिल्ली के धीरपुर गाँव का वह मकान, जिसमें सुनील बौद्ध का जन्म हुआ और जहाँ उनका परिवार वर्तमान समय तक निवास कर रहा है, उनके पिता के लंबे संघर्ष का प्रतीक है।
परिवार पहले इसी मकान में किरायेदार के रूप में रहता था। बाद में श्री दरियाव सिंह ने अपनी संचित पूँजी से इसे खरीदा। मकान खरीदने के बाद भी कुछ पुराने किरायेदारों ने स्थान खाली नहीं किया, जिसके कारण संपत्ति संबंधी विवाद उत्पन्न हुए।
इन विवादों को सुलझाने में परिवार को अतिरिक्त आर्थिक व्यय, कानूनी कार्यवाही तथा गंभीर व्यक्तिगत कठिनाइयों से गुजरना पड़ा। इन परिस्थितियों का प्रभाव परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति पर भी पड़ा।
इसके बावजूद श्री दरियाव सिंह ने अलग-अलग समय पर वर्ष 1995, 2001 और 2005 में मकान का निर्माण और विस्तार कराया।
उनके निधन के बाद मकान का लगभग 30 वर्ग गज का अत्यंत पुराना और जर्जर हिस्सा वर्ष 2017 में दोनों भाइयों ने अपनी जमा पूँजी से लगभग ₹13.5 लाख खर्च करके दोबारा बनवाया।
आज भी दोनों भाई अपने-अपने परिवार के साथ इसी मकान की अलग-अलग मंजिलों पर रहते हैं।
यह घर सुनील बौद्ध के लिए केवल निवास नहीं, बल्कि उनके पिता के श्रम, त्याग, संघर्ष एवं परिवार को स्थापित करने के संकल्प की स्मृति है।
बचपन, माता-पिता और प्रारंभिक जीवन
सुनील बौद्ध का जन्म 30 सितंबर 1984 को धीरपुर गाँव, उत्तरी दिल्ली में हुआ था। हालांकि उनके विद्यालय एवं सरकारी दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि 1 मार्च 1984 दर्ज है।
वे चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। परिवार में उनकी बड़ी बहन वर्षा, भाई सुशील तथा बहन नीतू हैं।
उनके जन्म से पहले ही उनकी माता श्रीमती धनपति देवी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो गई थीं, जिसके कारण बचपन में सुनील को सामान्य मातृस्नेह और देखभाल का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका।
उनका पालन-पोषण आर्थिक अभाव और पारिवारिक चुनौतियों के बीच हुआ। उन्होंने कम आयु से ही आत्मनिर्भरता, मेहनत और शिक्षा का महत्व समझना प्रारंभ किया।
28 जुलाई 2006 को उनकी माता श्रीमती धनपति देवी का निधन हो गया।
23 मई 2012 को उनके पिता श्री दरियाव सिंह का भी निधन हो गया।
माता-पिता के जीवनकाल में देखे गए संघर्ष तथा उनके निधन के बाद बढ़ती पारिवारिक जिम्मेदारियों ने सुनील बौद्ध के व्यक्तिगत और सामाजिक दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया।
शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण
सुनील बौद्ध ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली नगर निगम के प्राथमिक विद्यालय, मुखर्जी नगर से प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 1989 से 1994 के दौरान नर्सरी से पाँचवीं कक्षा तक अध्ययन किया।
इसके बाद वर्ष 1994 से 2002 तक संत निरंकारी बॉयज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, निरंकारी कॉलोनी, दिल्ली से छठी से बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा पूरी की।
आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार प्राप्त करने की दिशा में प्रयास शुरू किए।
बाद में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) से बी.ए. प्रोग्राम के अंतर्गत स्नातक शिक्षा पूरी की।
तकनीकी दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से उन्होंने Jetking, शालीमार बाग, दिल्ली में कंप्यूटर हार्डवेयर तथा Arena, कमला नगर, दिल्ली में मल्टीमीडिया एवं डिजाइनिंग का प्रशिक्षण भी लिया। आर्थिक सीमाओं के कारण ये दोनों व्यावसायिक पाठ्यक्रम पूर्ण नहीं हो सके, लेकिन इनसे प्राप्त व्यावहारिक ज्ञान आगे चलकर उनके व्यवसाय में उपयोगी सिद्ध हुआ।
व्यावसायिक जीवन की शुरुआत (2002–2005)
सुनील बौद्ध ने वर्ष 2002 में औपचारिक रोजगार के क्षेत्र में प्रवेश किया।
उन्होंने दिल्ली के डेरावाल नगर, मॉडल टाउन स्थित नितिन इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान में डॉल्फिन कंपनी के कार सीट कवर जैसे उत्पादों की बिक्री से अपना करियर प्रारंभ किया।
प्रारंभ में वे सेल्स एग्जीक्यूटिव रहे और बाद में स्टोर कीपर की जिम्मेदारी संभाली। इस प्रतिष्ठान में उन्होंने वर्ष 2002 से 2004 तक कार्य किया।
वर्ष 2004 से 2005 के दौरान उन्होंने सोनीपत, हरियाणा स्थित कनक गार्डन रिजॉर्ट में किचन सुपरवाइजर के रूप में कार्य किया।
इन नौकरियों से उन्हें ग्राहक सेवा, बिक्री, प्रबंधन, स्टॉक नियंत्रण तथा कर्मचारियों के साथ कार्य करने का अनुभव प्राप्त हुआ।
उद्यमिता की शुरुआत और विभिन्न व्यावसायिक प्रयास (2005–2013)
निजी नौकरी के सीमित अवसरों के बीच सुनील बौद्ध ने स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने का निर्णय लिया।
नवंबर 2005 से उन्होंने धीरपुर गाँव में कंप्यूटर, डिजाइनिंग और प्रिंटिंग से संबंधित कार्य शुरू किया। प्रारंभिक व्यावसायिक गतिविधियों को उन्होंने आगे चलकर अलग-अलग संस्थानों और प्रतिष्ठानों के रूप में विकसित करने का प्रयास किया।
प्रमुख व्यवसायों का क्रमबद्ध विवरण
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अवधि |
व्यवसाय / कार्यक्षेत्र |
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2005–2007 |
S S Graphics – डिजाइनिंग एवं प्रिंटिंग |
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2007–2011 |
Dahiya Enterprises – कंप्यूटर एवं प्रिंटिंग सेवाएँ |
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2008–2012 |
OM Studio – फोटोग्राफी एवं फोटो स्टूडियो |
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2010–2012 |
Ocean Trading Company – आयात-निर्यात एवं ट्रेडिंग |
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2011–2013 |
Turning Point Institute – प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग |
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2013–2019 |
LNJP एवं संबंधित कार्यालयों में निजी/अनुबंधित रोजगार |
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जनवरी 2022–वर्तमान |
Delhi Digital Solution – डिजिटल एवं दस्तावेज़ सेवाएँ |
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2022–वर्तमान |
Disha Path Lab & Clinic – साझेदारी आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ |
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2023–2025 |
Ashoka Canteen – फास्ट फूड एवं भोजन व्यवसाय |
OM Studio और प्रिंटिंग व्यवसाय
वर्ष 2008 में उन्होंने नरेला, दिल्ली के मुख्य बाजार स्थित झंडा चौक के निकट OM Studio के नाम से फोटो स्टूडियो स्थापित किया।
धीरपुर और नरेला के बीच लगभग 26 किलोमीटर की दूरी तथा दोनों व्यवसायों को एक साथ संभालने की कठिनाइयों के कारण व्यवसाय का विस्तार अपेक्षा के अनुसार नहीं हो सका।
Ocean Trading Company
वर्ष 2010 के आसपास उन्होंने एक व्यावसायिक सहयोगी के साथ Ocean Trading Company के माध्यम से टिश्यू पेपर, मिनरल वॉटर, फ्रूट जूस तथा अन्य उत्पादों की ट्रेडिंग और आयात-निर्यात से संबंधित गतिविधियाँ शुरू कीं।
उन्होंने वाहन सुरक्षा उपकरणों से संबंधित व्यवसाय में भी फ्रेंचाइजी के माध्यम से कार्य करने का प्रयास किया।
हालांकि साझेदारी संबंधी मतभेद और वित्तीय कठिनाइयों के कारण यह व्यवसाय आगे नहीं बढ़ सका।
Turning Point Institute
वर्ष 2011 से 2013 के दौरान उन्होंने राहुल नामक सहयोगी के साथ Turning Point Institute नामक कोचिंग सेंटर संचालित किया।
इस संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को सरकारी नौकरियों तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाना था।
उनके अनुसार, संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक विद्यार्थियों को बाद में सरकारी सेवाओं में सफलता मिली।
इस अवधि में उन्होंने स्वयं भी UPSC और SSC जैसी परीक्षाओं की तैयारी की तथा परीक्षाओं में भाग लिया। हालांकि वे सरकारी सेवा प्राप्त नहीं कर सके, लेकिन इस अध्ययन से भारतीय संविधान, प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक संरचना और नागरिक अधिकारों के प्रति उनकी समझ विकसित हुई।
व्यक्तिगत आर्थिक जिम्मेदारियों, संस्थान के खर्च और बढ़ती सामाजिक सक्रियता के कारण बाद में कोचिंग सेंटर बंद करना पड़ा।
निजी रोजगार और सामाजिक चेतना का विकास (2013–2019)
व्यवसायों में आई कठिनाइयों के बाद सुनील बौद्ध ने पुनः विभिन्न निजी एवं अनुबंधित नौकरियों में कार्य किया।
उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) के विद्युत कार्यों से संबंधित निजी कंपनी के अंतर्गत साइट सुपरवाइजर तथा LNJP अस्पताल में लिफ्ट ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर और सुपरवाइजर जैसी जिम्मेदारियाँ संभालीं।
इसी समय उनकी सामाजिक और वैचारिक गतिविधियाँ भी आगे बढ़ती रहीं।
वर्ष 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन से उन्हें सार्वजनिक जीवन, जनभागीदारी, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़े विषयों में रुचि हुई।
वर्ष 2013 में डॉ. बी. आर. आंबेडकर के जीवन, विचारों और सामाजिक आंदोलनों का अध्ययन उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण वैचारिक परिवर्तन का आधार बना।
इसके बाद उन्होंने रोजगार और परिवार के साथ सामाजिक न्याय तथा बौद्ध समुदाय से संबंधित कार्यों को अपने सार्वजनिक जीवन का प्रमुख हिस्सा बनाया।
डॉ. आंबेडकर के विचारों से प्रेरणा और बौद्ध धम्म की ओर यात्रा
वर्ष 2013 से सुनील बौद्ध ने बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक विचारों का अध्ययन शुरू किया।
उनकी सामाजिक सक्रियता का प्रारंभ समता सैनिक दल से जुड़ाव के माध्यम से हुआ।
वर्ष 2015 में वे Republican Party of India (RPI) की गतिविधियों से जुड़े।
सितंबर 2016 में उन्हें डॉ. आंबेडकर द्वारा स्थापित The Buddhist Society of India (भारतीय बौद्ध महासभा) से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ।
वर्ष 2017 में उन्होंने हिंदू धर्म का त्याग कर बौद्ध धम्म की दीक्षा ग्रहण की। इस परिवर्तन के बाद उनका परिवार बौद्ध जीवन-मूल्यों और परंपराओं से जुड़ा।
वर्ष 2018 उनके सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसी समय से उन्होंने बौद्ध समुदाय के राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक, ऐतिहासिक और कानूनी प्रश्नों पर अधिक संगठित रूप से कार्य करना शुरू किया।
उनके अनुसार, बौद्ध धम्म का संबंध केवल व्यक्तिगत धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि करुणा, प्रज्ञा, समता, बंधुत्व, नैतिक आचरण और मानवीय गरिमा से भी है।
सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों में प्रमुख जिम्मेदारियाँ
1. The Buddhist Society of India (भारतीय बौद्ध महासभा)
The Buddhist Society of India की स्थापना डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार तथा सामाजिक परिवर्तन के उद्देश्य से की गई थी।
सुनील बौद्ध सितंबर 2016 से इस संस्था से जुड़े हैं।
वर्ष 2025 में उन्होंने दिल्ली ट्रस्टी तथा उत्तर भारत प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली। इस भूमिका में वे बौद्ध समुदाय के संगठनात्मक समन्वय, धार्मिक कार्यक्रमों, ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं प्रशासनिक स्तर पर मांगों को उठाने जैसे कार्यों से जुड़े हुए हैं।
वे संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी से संबंधित बैठकों और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते रहे हैं। नागपुर स्थित दीक्षाभूमि तथा संगठन की नागपुर में आयोजित बैठकों से भी उनका नियमित जुड़ाव रहा है।
2. All India Action Committee for Buddhist Personal Law
सुनील बौद्ध वर्ष 2018 से All India Action Committee for Buddhist Personal Law के सक्रिय सदस्य रहे हैं।
वर्ष 2022 में उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभाली और अक्टूबर 2026 तक इस पद पर कार्यरत हैं।
इस समिति का प्रमुख उद्देश्य भारतीय बौद्ध समुदाय के लिए पृथक पर्सनल लॉ से संबंधित कानूनी एवं संवैधानिक मुद्दों को सरकार और संबंधित न्यायिक मंचों के समक्ष उठाना है।
समिति के माध्यम से वे राष्ट्रीय बैठकों, जनजागरूकता कार्यक्रमों, पैदल मार्च, ज्ञापन, संगठित अभियानों और न्यायिक कार्यवाहियों से जुड़े रहे हैं।
3. Ashoka Raj Foundation
नवंबर 2022 में उन्होंने Ashoka Raj Foundation की स्थापना की।
फाउंडेशन का प्रमुख कार्यक्षेत्र ऐतिहासिक बौद्ध धरोहरों, विशेष रूप से सम्राट अशोक के काल से जुड़े स्थलों के संरक्षण, विकास एवं पुनरुद्धार से संबंधित प्रयास करना है।
फाउंडेशन के माध्यम से दिल्ली, गुजरात, हरियाणा तथा अन्य स्थानों पर ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के लिए संबंधित सरकारी विभागों को ज्ञापन देने और प्रशासनिक कार्रवाई का अनुरोध करने जैसी गतिविधियाँ संचालित की गई हैं।
4. Live Lord Buddha Foundation
नवंबर 2022 में उन्होंने Live Lord Buddha Foundation की भी स्थापना की।
यह संस्था बौद्ध धम्म से संबंधित सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक तथा सामुदायिक कल्याण कार्यों के उद्देश्य से उनके संगठनात्मक प्रयासों का हिस्सा है।
पाँच प्रमुख सामाजिक, धार्मिक एवं कानूनी अभियान
पहला अभियान: साकेत नगरी (अयोध्या) और बौद्ध ऐतिहासिक अवशेषों का प्रश्न
वर्ष 2018 में सुनील बौद्ध ने The Buddhist Society of India के माध्यम से ऐतिहासिक साकेत नगरी, वर्तमान अयोध्या, से संबंधित बौद्ध इतिहास और विरासत के विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
उनके विवरण के अनुसार, इस विषय को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उठाने के प्रयासों में वे सहभागी रहे।
वर्ष 2022 में अयोध्या क्षेत्र में मिले बताए गए बौद्ध अवशेषों की सुरक्षा और संरक्षण की मांग को लेकर पुनः न्यायिक हस्तक्षेप के प्रयास किए गए।
इस अभियान का उद्देश्य ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक महत्व के अवशेषों की पहचान, सुरक्षा तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत संरक्षण की मांग करना रहा है।
दूसरा अभियान: ऐतिहासिक चाँदनी चौक बुद्ध विहार का संरक्षण और निर्माण
सुनील बौद्ध के सार्वजनिक जीवन के प्रमुख कार्यों में दिल्ली के फतेहपुरी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक बौद्ध स्थल, पूर्व में बुद्ध पूजा स्थली बाग दीवार के नाम से पहचाने जाने वाले स्थान, के संरक्षण का अभियान शामिल है।
वर्ष 2018 से उन्होंने The Buddhist Society of India के बैनर तले इस स्थल से जुड़े अतिक्रमण और संरक्षण के प्रश्नों पर सक्रियता दिखाई।
उनके अनुसार, संगठनात्मक प्रयासों से लगभग 250 वर्ग गज क्षेत्र के संरक्षण की दिशा में कार्य किया गया और इस स्थान को चाँदनी चौक बुद्ध विहार के नाम से पहचान दिलाने का अभियान चलाया गया।
वर्ष 2019 में यहाँ अस्थायी निर्माण कार्य कराया गया।
9 मार्च 2026 को इस स्थल पर बौद्ध एकता सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थायी निर्माण, बौद्ध समाज की एकता तथा ऐतिहासिक स्थल के व्यापक विकास के लिए सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा देना था।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास आठवले की उपस्थिति भी रही।
सुनील बौद्ध के दिए विवरण के अनुसार, 26 मार्च 2026 से विहार में स्थायी निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया, जो अक्टूबर 2026 तक जारी है।
यह अभियान धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और बौद्ध समाज की संस्थागत पहचान से जुड़ा हुआ है।
तीसरा अभियान: भारतीय बौद्धों के लिए पृथक पर्सनल लॉ
वर्ष 2018 से All India Action Committee for Buddhist Personal Law के माध्यम से भारतीय बौद्ध समुदाय के लिए पृथक व्यक्तिगत कानून की मांग पर अभियान चलाया जा रहा है।
इस अभियान के अंतर्गत विवाह, पारिवारिक संबंधों तथा अन्य व्यक्तिगत कानूनी विषयों में बौद्ध समुदाय की धार्मिक पहचान और कानूनी आवश्यकताओं से जुड़े प्रश्न उठाए गए हैं।
सुनील बौद्ध इस अभियान में राष्ट्रीय स्तर की बैठकों, पैदल मार्च, सम्मेलनों, ज्ञापनों तथा विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं।
उनके अनुसार, समिति द्वारा प्रस्तावित बुद्धिस्ट पर्सनल लॉ का मसौदा केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया है तथा संबंधित मामलों में सर्वोच्च न्यायालय से दो आदेश प्राप्त हुए हैं।
इन आदेशों की प्रकृति और कानूनी प्रभाव का अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायालयी दस्तावेजों से किया जाना आवश्यक है।
वर्ष 2022 से समिति के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में वे इस अभियान के संगठनात्मक और प्रतिनिधित्व संबंधी कार्यों में सक्रिय हैं।
चौथा अभियान: बौद्ध समुदाय के कल्याण और सरकारी संस्थाओं के समक्ष प्रतिनिधित्व
सुनील बौद्ध ने The Buddhist Society of India और Ashoka Raj Foundation के माध्यम से भारतीय बौद्ध समुदाय के सामाजिक, धार्मिक एवं प्रशासनिक हितों को विभिन्न सरकारी संस्थाओं के समक्ष उठाने का कार्य किया है।
उनकी गतिविधियों में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता से जुड़े मंत्रालयों तथा अन्य संबंधित विभागों को ज्ञापन और मांगपत्र देना शामिल है।
इन प्रयासों के प्रमुख विषय बौद्ध समुदाय के कानूनी अधिकार, धार्मिक संस्थानों की समस्याएँ, सामाजिक कल्याण योजनाओं तक पहुँच, ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का संरक्षण तथा प्रशासनिक स्तर पर समुदाय की शिकायतों का समाधान रहे हैं।
अक्टूबर 2026 तक वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग सहित विभिन्न सरकारी संस्थाओं के समक्ष बौद्ध समुदाय की मांगों को प्रस्तुत करने के प्रयासों में सक्रिय हैं।
पाँचवाँ अभियान: महाबोधि महाविहार, बोधगया और BTMC Act
बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार के प्रबंधन एवं उससे संबंधित Bodh Gaya Temple Management Committee Act (BTMC Act) का प्रश्न सुनील बौद्ध की प्रमुख सामाजिक सक्रियताओं में शामिल रहा है।
उनके अनुसार, वर्ष 2019 में The Buddhist Society of India की ओर से इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण से संबंधित हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
वर्ष 2023 में इस मुद्दे पर प्रारंभ हुए व्यापक जनआंदोलनों में भी उन्होंने भाग लिया और बौद्ध संगठनों की मांगों के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई।
इस विषय से संबंधित राष्ट्रीय बैठकों, विरोध प्रदर्शनों, पैदल मार्च, ज्ञापनों, सम्मेलनों और सामुदायिक आयोजनों में उनकी भागीदारी जारी रही है।
उनके दिए विवरण के अनुसार, मई 2025 से संबंधित न्यायिक मामले में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अक्टूबर 2026 तक विषय न्यायिक विचाराधीन रहा।
उनका उद्देश्य महाबोधि महाविहार के प्रबंधन एवं संरक्षण में बौद्ध समुदाय की धार्मिक भावनाओं, अधिकारों तथा भागीदारी से जुड़े प्रश्नों को प्रमुखता देना रहा है।
बौद्ध एकता सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह — 9 मार्च 2026
9 मार्च 2026 को दिल्ली के ऐतिहासिक चाँदनी चौक बुद्ध विहार में बौद्ध एकता सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों, धार्मिक व्यक्तित्वों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने सहभागिता की।
इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बौद्ध समाज में संगठनात्मक एकता को मजबूत करना तथा ऐतिहासिक चाँदनी चौक बुद्ध विहार के स्थायी निर्माण और विकास के लिए व्यापक जनसमर्थन प्राप्त करना था।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री रामदास आठवले सहित विभिन्न अतिथियों की उपस्थिति रही।
सुनील बौद्ध इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
नागपुर दीक्षाभूमि और संगठनात्मक गतिविधियाँ
नागपुर स्थित दीक्षाभूमि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन और आधुनिक भारतीय बौद्ध आंदोलन का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है।
14 अक्टूबर 1956 को डॉ. आंबेडकर ने इसी स्थान पर अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म की दीक्षा ग्रहण की थी।
सुनील बौद्ध इस स्थान को अपने वैचारिक एवं धार्मिक जीवन में विशेष महत्व देते हैं और समय-समय पर यहाँ जाते रहे हैं।
नागपुर में The Buddhist Society of India की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठकों एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी उनकी भागीदारी रही है।
इन गतिविधियों के माध्यम से वे विभिन्न राज्यों के बौद्ध प्रतिनिधियों से संवाद, संगठनात्मक समन्वय और सामुदायिक प्रश्नों पर विचार-विमर्श करते हैं।
वर्तमान व्यावसायिक गतिविधियाँ — Delhi Digital Solution Private Limited
सामाजिक और धार्मिक कार्यों के साथ पारिवारिक आजीविका के लिए सुनील बौद्ध ने जनवरी 2022 में दिल्ली डिजिटल सॉल्यूशन के नाम से डिजिटल सेवाओं का व्यवसाय प्रारंभ किया।
वर्ष 2026 में व्यवसाय को Delhi Digital Solution Private Limited कंपनी के रूप में परिवर्तित किया गया।
वर्तमान में इसकी दो छोटी शाखाएँ दिल्ली के धीरपुर गाँव और निरंकारी कॉलोनी क्षेत्र में संचालित हैं।
प्रमुख सेवाएँ
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सरकारी प्रमाणपत्र, पहचान पत्र एवं ऑनलाइन आवेदन संबंधी सेवाएँ
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विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं सरकारी योजनाओं के ऑनलाइन फॉर्म
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पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र एवं अन्य दस्तावेज़ संबंधी सहायता
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कंप्यूटर डिजाइनिंग, डिजिटल प्रिंटिंग और फोटोकॉपी
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हिंदी एवं अंग्रेजी टाइपिंग
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एफिडेविट, ई-स्टाम्प एवं दस्तावेज़ तैयार करने से संबंधित सेवाएँ
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लेमिनेशन, विजिटिंग कार्ड, लेटरहेड एवं अन्य मुद्रण कार्य
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ऑनलाइन भुगतान एवं विभिन्न डिजिटल सुविधा सेवाएँ
कंपनी का उद्देश्य स्थानीय नागरिकों को डिजिटल सेवाओं और आवश्यक दस्तावेज़ संबंधी सुविधाओं तक सरल पहुँच प्रदान करना है।
Disha Path Lab & Clinic
Delhi Digital Solution की व्यावसायिक गतिविधियों के साथ साझेदारी में Disha Path Lab & Clinic भी संचालित है।
इस व्यवसाय से तीन सहयोगी जुड़े हैं:
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सुनील बौद्ध (Sunil Baudh)
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डॉ. सुरेश कुमार
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डॉ. दिलीप कुमार
यह केंद्र पैथोलॉजी जाँच एवं संबंधित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने से जुड़ा है।
धीरपुर स्थित कार्यालय
411A, धीरपुर गाँव, गली नंबर 1, शिव मंदिर के निकट, पी.ओ. निरंकारी कॉलोनी, दिल्ली – 110009।
इसके अतिरिक्त निरंकारी कॉलोनी की मुख्य सड़क पर भी डिजिटल सेवाओं का केंद्र संचालित है।
Ashoka Canteen — खाद्य व्यवसाय में अनुभव (2023–2025)
डिजिटल सेवाओं के अतिरिक्त सुनील बौद्ध ने फास्ट फूड एवं भोजन व्यवसाय में भी अनुभव प्राप्त किया।
वर्ष 2023 में उन्होंने अपने गृहक्षेत्र धीरपुर गाँव में Ashoka Canteen (अशोका कैंटिन) की शुरुआत की।
फरवरी 2024 में व्यवसाय को हरियाणा के सबोली औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया, जहाँ इसका संचालन वर्ष 2025 के अंत तक जारी रहा।
कैंटिन में चाय, कॉफी, पराठे, पेटीज, सैंडविच, टिक्की, चाउमीन, कोल्ड ड्रिंक, मोमोज, कचौड़ी-सब्जी, रोटी-सब्जी सहित विभिन्न प्रकार के फास्ट फूड एवं भोजन उपलब्ध कराए जाते थे।
इस व्यवसाय ने उन्हें खाद्य सेवा, ग्राहक प्रबंधन, दैनिक संचालन और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के प्रबंधन का अतिरिक्त अनुभव प्रदान किया।
वैवाहिक एवं पारिवारिक जीवन
सुनील बौद्ध का विवाह 18 अप्रैल 2006 को श्रीमती ललिता से हुआ।
उनकी तीन पुत्रियाँ हैं—इंद्राक्षी, तनिशा और वंशिका। उनकी पहली पुत्री इंद्राक्षी का जन्म 8 जुलाई 2010 को हुआ।
उनका परिवार दिल्ली के उसी धीरपुर स्थित मकान में रहता है, जहाँ उनका जन्म हुआ था और जहाँ उनके पिता ने अनेक कठिन परिस्थितियों में परिवार के लिए स्थायी निवास की व्यवस्था की थी।
विभिन्न व्यावसायिक असफलताओं और आर्थिक कठिनाइयों के बीच उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वाह करने के साथ सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों को जारी रखा।
उनके जीवन में आत्मनिर्भरता, पारिवारिक उत्तरदायित्व, निरंतर परिश्रम तथा सामाजिक योगदान महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
जीवन-दृष्टिकोण एवं सामाजिक विचार
सुनील बौद्ध के जीवन की वैचारिक दिशा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सामाजिक न्याय, शिक्षा, संगठन, संघर्ष तथा संवैधानिक समानता के सिद्धांतों से प्रभावित रही है।
उनके लिए शिक्षा आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम रही है। व्यक्तिगत जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करने के कारण वे सामाजिक वंचना, आर्थिक असमानता और अवसरों की कमी जैसे विषयों को अपने अनुभवों से जोड़कर देखते हैं।
वर्ष 2017 में बौद्ध धम्म अपनाने के बाद उनके धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में करुणा, नैतिकता, सामाजिक समरसता और बंधुत्व के मूल्यों को अधिक महत्व मिला।
वे मानते हैं कि धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं का कार्य केवल कार्यक्रमों का आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं को संगठित और संवैधानिक माध्यमों से उठाना भी होना चाहिए।
प्रमुख उद्देश्य एवं भविष्य की प्राथमिकताएँ
अक्टूबर 2026 तक सुनील बौद्ध अपने पारिवारिक व्यवसाय के साथ सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में सक्रिय हैं।
उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में ऐतिहासिक चाँदनी चौक बुद्ध विहार के स्थायी निर्माण एवं संरक्षण का कार्य आगे बढ़ाना, भारतीय बौद्ध समुदाय के पर्सनल लॉ संबंधी अभियान को जारी रखना तथा ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों के संरक्षण की मांग को विभिन्न संस्थागत मंचों तक पहुँचाना शामिल है।
इसके अतिरिक्त वे बौद्ध समाज की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक कल्याण, संवैधानिक अधिकारों एवं सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं पर प्रतिनिधित्व और जनजागरूकता के प्रयास जारी रखना चाहते हैं।
उनकी व्यावसायिक प्राथमिकता Delhi Digital Solution Private Limited और उससे संबंधित सेवा केंद्रों को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हुए परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वाह करना है।
महत्वपूर्ण जीवन-यात्रा : कालक्रम
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वर्ष |
प्रमुख घटना |
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1984 |
दिल्ली के धीरपुर गाँव में जन्म |
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1989–2002 |
प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा |
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2002–2005 |
निजी नौकरी और व्यावसायिक अनुभव |
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2005 |
कंप्यूटर, डिजाइनिंग और प्रिंटिंग व्यवसाय की शुरुआत |
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2006 |
विवाह एवं माता का निधन |
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2008 |
नरेला में OM Studio की स्थापना |
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2010 |
पहली पुत्री इंद्राक्षी का जन्म |
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2011 |
जनआंदोलन से प्रेरणा एवं सामाजिक सक्रियता |
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2011–2013 |
Turning Point Institute का संचालन |
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2012 |
पिता का निधन |
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2013 |
डॉ. आंबेडकर के विचारों और सामाजिक मिशन से सक्रिय जुड़ाव |
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2015 |
RPI से जुड़ाव |
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सितंबर 2016 |
The Buddhist Society of India से जुड़ाव |
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2017 |
बौद्ध धम्म की दीक्षा |
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2018 |
बौद्ध अधिकारों एवं विरासत संरक्षण अभियानों में सक्रिय भूमिका |
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2019 |
चाँदनी चौक बुद्ध विहार में अस्थायी निर्माण से संबंधित प्रयास |
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जनवरी 2022 |
Delhi Digital Solution का संचालन प्रारंभ |
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नवंबर 2022 |
Ashoka Raj Foundation एवं Live Lord Buddha Foundation की स्थापना |
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2022 |
All India Action Committee के राष्ट्रीय महासचिव बने |
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2023 |
Ashoka Canteen की शुरुआत |
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2024 |
कैंटिन को सबोली औद्योगिक क्षेत्र, हरियाणा में स्थानांतरित किया |
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2025 |
भारतीय बौद्ध महासभा में दिल्ली ट्रस्टी एवं उत्तर भारत प्रभारी बने |
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2025 |
Ashoka Canteen का संचालन समाप्त |
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9 मार्च 2026 |
चाँदनी चौक बुद्ध विहार में बौद्ध एकता सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह |
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26 मार्च 2026 |
चाँदनी चौक बुद्ध विहार के स्थायी निर्माण का आरंभ, दिए गए विवरण के अनुसार |
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2026 |
Delhi Digital Solution को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में परिवर्तित किया गया |
संपर्क एवं आधिकारिक डिजिटल उपस्थिति
व्यक्तिगत ईमेल: dahiya149@gmail.com
व्यावसायिक ईमेल: delhidigitalsolution@gmail.com, ddsJansevak@gmail.com
Ashoka Raj Foundation:
The Buddhist Society of India:
| thebuddhistsocietyofindia.org
| info@thebuddhistsocietyofindia.com
सोशल मीडिया:
YouTube Channel
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निष्कर्ष
सुनील बौद्ध का जीवन साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से शुरू होकर आत्मनिर्भरता, उद्यमिता, वैचारिक परिवर्तन और सामाजिक सक्रियता तक की एक विस्तृत यात्रा को प्रस्तुत करता है।
उनके पिता द्वारा सीमित संसाधनों में परिवार को स्थापित करने का संघर्ष, बचपन की कठिन परिस्थितियाँ, शिक्षा के साथ आत्मनिर्भर बनने के प्रयास, अनेक नौकरियाँ और व्यवसाय तथा बाद में डॉ. आंबेडकर के विचारों से प्रेरित सामाजिक जीवन—ये सभी उनकी व्यक्तिगत और सार्वजनिक पहचान के महत्वपूर्ण पक्ष हैं।
वर्ष 2013 से सामाजिक न्याय के विषयों पर उनकी बढ़ती सक्रियता और वर्ष 2018 से बौद्ध समुदाय के राष्ट्रीय स्तर के प्रश्नों पर किए गए संगठनात्मक प्रयास उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख अध्याय रहे हैं।
अक्टूबर 2026 तक वे पारिवारिक व्यवसाय का संचालन करते हुए ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों के संरक्षण, बौद्ध समुदाय के कानूनी अधिकारों तथा सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं।
उनकी जीवन-यात्रा में व्यक्तिगत संघर्ष, आर्थिक आत्मनिर्भरता, पारिवारिक जिम्मेदारी और सामाजिक प्रतिबद्धता का निरंतर समन्वय दिखाई देता है।