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Dr. Sharad Kumar Shankhdhar

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Dr. Sharad Kumar Shankhdhar
Dr. Sharad Kumar Shankhdhar
Dr. Sharad Kumar Shankhdhar
Born 21 October 1968 (India)
Education Master of Arts (M.A.) in Hindi
Occupation Journalist, Editor, Author
Years active 1989–present
Notable awards Ganesh Shankar Vidyarthi Award, Premchand Sahitya Puraskar, Kaka Kalelkar Award, Kabir Award, Tulsi Award
Honorary Doctorate Cedarbrook University (USA)

 

डॉ. शरद कुमार शंखधर

भाग–1

प्रारंभिक जीवन, शिक्षा और एक पत्रकार का निर्माण

सत्य, साहित्य और जनसेवा को समर्पित एक जीवन


प्रस्तावना

हर युग में कुछ ऐसे पत्रकार जन्म लेते हैं जिनका कार्य केवल समाचार लिखने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे अपने समय के इतिहास के साक्षी, समाज के मार्गदर्शक और लोकतंत्र के सशक्त प्रहरी बन जाते हैं। उनका जीवन केवल घटनाओं का दस्तावेज़ तैयार नहीं करता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विचार, मूल्य और सत्यनिष्ठा की विरासत छोड़ जाता है।

डॉ. शरद कुमार शंखधर ऐसे ही विशिष्ट भारतीय पत्रकारों में से एक हैं, जिनका लगभग चार दशकों से अधिक का पत्रकारिता जीवन भारतीय हिंदी पत्रकारिता के विकास, संघर्ष, परिवर्तन और उत्कृष्टता का जीवंत इतिहास प्रस्तुत करता है।

वे केवल एक वरिष्ठ पत्रकार नहीं हैं, बल्कि एक कुशल संपादक, साहित्यकार, चिंतक, मीडिया रणनीतिकार तथा जनसरोकारों के सजग प्रहरी भी हैं। अपने दीर्घ पत्रकारिता जीवन में उन्होंने देश के अनेक प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों और मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हुए पत्रकारिता की उस परंपरा को जीवित रखा, जिसमें सत्य सर्वोपरि होता है और समाज की सेवा ही पत्रकार का सर्वोच्च धर्म माना जाता है।

उनकी व्यावसायिक यात्रा भारतीय पत्रकारिता के उस स्वर्णिम दौर से प्रारम्भ होती है जब समाचार-पत्र समाज की सबसे विश्वसनीय आवाज़ माने जाते थे। टाइपराइटर, प्रूफरीडिंग, लेटरप्रेस और पारंपरिक समाचार-संपादन से लेकर आज के डिजिटल न्यूज़ पोर्टल, मोबाइल पत्रकारिता और सोशल मीडिया आधारित सूचना-युग तक उन्होंने भारतीय मीडिया को बदलते हुए न केवल देखा, बल्कि स्वयं उस परिवर्तन का सक्रिय हिस्सा भी बने।

समय के साथ तकनीक बदलती रही, समाचारों के माध्यम बदलते रहे, पाठकों की आदतें बदलती रहीं, लेकिन उनके मूल सिद्धांत कभी नहीं बदले। उन्होंने सदैव माना कि पत्रकारिता कोई व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व है। सत्य, निष्पक्षता, विश्वसनीयता और जनविश्वास—यही उनके पूरे जीवन की पत्रकारिता के आधारस्तंभ रहे।

पत्रकारिता के समानांतर उन्होंने हिंदी साहित्य को भी समृद्ध किया। कविता और कहानी के माध्यम से उन्होंने मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और जीवन मूल्यों को अभिव्यक्ति दी। उनकी साहित्यिक रचनाएँ उनके व्यक्तित्व के उस पक्ष को सामने लाती हैं जहाँ एक पत्रकार के भीतर छिपा संवेदनशील साहित्यकार समाज के दर्द, संघर्ष और आशाओं को शब्द देता है।

अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। पत्रकारिता और साहित्य में आजीवन योगदान के लिए उन्हें मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate) सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। ये सम्मान केवल उनके कार्य की उपलब्धियाँ नहीं हैं, बल्कि सत्यनिष्ठ पत्रकारिता और सामाजिक प्रतिबद्धता के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का सार्वजनिक स्वीकार भी हैं।

आज डॉ. शरद कुमार शंखधर का नाम अनुभव, विश्वसनीयता, नैतिकता और समर्पण का पर्याय माना जाता है। बदलते मीडिया परिवेश में भी उनका व्यक्तित्व इस बात का प्रमाण है कि यदि पत्रकार सत्य के प्रति ईमानदार रहे, तो समय बदल सकता है, लेकिन उसकी प्रतिष्ठा कभी कम नहीं होती।


प्रारंभिक जीवन एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि

डॉ. शरद कुमार शंखधर का जन्म 21 अक्टूबर 1968 को भारत में हुआ। यह वह समय था जब देश सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा था। स्वतंत्र भारत नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा था और शिक्षा, भाषा तथा सामाजिक चेतना को नई दिशा मिल रही थी।

ऐसे वातावरण में उनका बचपन बीता जहाँ शिक्षा, अनुशासन, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों को विशेष महत्व दिया जाता था। यही संस्कार आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी शक्ति बने।

यद्यपि उपलब्ध अभिलेखों में उनके पारिवारिक जीवन का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है, किन्तु उनकी उपलब्धियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि उन्हें ऐसा वातावरण प्राप्त हुआ जिसने अध्ययन, चिंतन, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे गुणों का विकास किया।

उनका बचपन उस समय में बीता जब समाचार-पत्र भारत के करोड़ों लोगों के लिए सूचना का सबसे विश्वसनीय माध्यम थे। दूरदर्शन सीमित था, इंटरनेट और सोशल मीडिया का अस्तित्व नहीं था। ऐसे समय में अख़बार केवल समाचार नहीं पहुँचाते थे, बल्कि समाज की सोच और लोकतांत्रिक चेतना को भी दिशा देते थे।

बाल्यावस्था से ही शरद कुमार शंखधर की रुचि पढ़ने, लिखने और समसामयिक विषयों को समझने में थी। वे केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि समाचार-पत्रों, संपादकीय लेखों, साहित्यिक कृतियों और सामाजिक विषयों का भी नियमित अध्ययन करते थे।

धीरे-धीरे भाषा पर उनकी पकड़ मजबूत होती गई और समाज को समझने की उनकी दृष्टि व्यापक होती चली गई। यही अध्ययनशीलता आगे चलकर उनके सफल पत्रकार और साहित्यकार बनने की आधारशिला सिद्ध हुई।


शिक्षा

डॉ. शरद कुमार शंखधर का विश्वास था कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने की सबसे प्रभावशाली शक्ति है। इसी विचार के साथ उन्होंने उच्च शिक्षा में हिंदी विषय का चयन किया और हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की उपाधि प्राप्त की।

हिंदी साहित्य का गंभीर अध्ययन उनके व्यक्तित्व के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ। विश्वविद्यालयी शिक्षा के दौरान उन्होंने भारतीय साहित्य, आधुनिक हिंदी आलोचना, भाषा-विज्ञान, अभिव्यक्ति की कला तथा साहित्यिक परंपराओं का गहन अध्ययन किया।

इस अध्ययन ने उनकी भाषा को परिष्कृत किया, अभिव्यक्ति को प्रभावशाली बनाया और विचारों को गहराई प्रदान की।

शिक्षा ने उन्हें केवल डिग्री नहीं दी, बल्कि आलोचनात्मक सोच, संतुलित दृष्टिकोण, तार्किक विश्लेषण और स्पष्ट अभिव्यक्ति जैसे गुण भी प्रदान किए। यही विशेषताएँ आगे चलकर उनकी पत्रकारिता की सबसे बड़ी पहचान बनीं।

अनेक पत्रकार केवल व्यावहारिक अनुभव के आधार पर आगे बढ़ते हैं, किन्तु डॉ. शंखधर ने अकादमिक अध्ययन और मैदानी अनुभव—दोनों को समान महत्व दिया। यही कारण है कि उनके लेखन में तथ्यात्मक मजबूती के साथ साहित्यिक संवेदनशीलता भी दिखाई देती है।

उनकी यही शैक्षणिक पृष्ठभूमि बाद में उनके साहित्यिक लेखन—विशेषकर कविता और कहानी—में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।


पत्रकारिता को जीवन-ध्येय के रूप में चुनना

अधिकांश लोगों के लिए नौकरी आजीविका का साधन होती है, लेकिन डॉ. शरद कुमार शंखधर के लिए पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की सेवा का माध्यम बन गई।

1980 के दशक के उत्तरार्ध में भारतीय पत्रकारिता अपने प्रभाव के चरम पर थी। समाचार-पत्र लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में जनता और शासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते थे। पत्रकारों से अपेक्षा की जाती थी कि वे तथ्यों की गहन पड़ताल करें, निष्पक्ष रहें और समाज के हितों को सर्वोपरि रखें।

इसी दौर में उन्होंने पत्रकारिता को अपने जीवन का उद्देश्य बनाने का निर्णय लिया।

उनका यह निर्णय केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का परिणाम नहीं था, बल्कि इस विश्वास पर आधारित था कि सही सूचना समाज को सशक्त बनाती है, लोकतंत्र को मजबूत करती है और आम नागरिक को उसकी आवाज़ देती है।

उन्होंने प्रारंभ से ही लोकप्रियता के बजाय विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी। उनका लक्ष्य प्रसिद्ध होना नहीं, बल्कि ऐसा पत्रकार बनना था जिस पर समाज भरोसा कर सके।

यही सिद्धांत आगे चलकर उनके पूरे व्यावसायिक जीवन की पहचान बना।


व्यावसायिक जीवन की शुरुआत

डॉ. शरद कुमार शंखधर ने वर्ष 1989 में औपचारिक रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया। यही वह वर्ष था जिसने उनके जीवन की दिशा निर्धारित की।

उनकी पहली महत्वपूर्ण नियुक्ति वीर अर्जुन समाचार-पत्र में हुई, जहाँ उन्होंने 1989 से 1991 तक उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कार्य किया।

यह काल उनके लिए सीखने, समझने और स्वयं को एक पत्रकार के रूप में स्थापित करने का समय था।

उस समय पत्रकारिता आज की तुलना में कहीं अधिक श्रमसाध्य थी। समाचारों के लिए घटनास्थल तक पहुँचना, प्रत्यक्ष तथ्यों का संग्रह करना, विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि करना, लंबी यात्राएँ करना और समय-सीमा के भीतर समाचार तैयार करना—ये सब एक पत्रकार के दैनिक जीवन का हिस्सा थे।

इन शुरुआती वर्षों में उन्होंने सीखा कि पत्रकारिता केवल समाचार लिखने की कला नहीं, बल्कि सत्य की खोज करने का अनुशासित प्रयास है।

उन्होंने समझा कि एक पत्रकार की सबसे बड़ी पूँजी उसका विश्वास होता है। यदि समाज पत्रकार पर विश्वास करता है, तो उसकी लेखनी परिवर्तन की शक्ति बन जाती है।

इसी दौरान उन्हें देश के सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक ढाँचे को निकट से देखने का अवसर मिला। ग्रामीण समस्याओं से लेकर शासन-प्रशासन तक अनेक विषयों ने उनकी समझ को व्यापक बनाया।


आत्मविश्वास और पेशेवर पहचान का विकास

पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों ने एक उत्साही युवा को परिपक्व पत्रकार में बदलना शुरू कर दिया।

उन्होंने केवल समाचार संकलन तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि संपादकीय बैठकों, समाचार विश्लेषण, समाचार-संपादन और न्यूज़रूम संचालन की बारीकियों को भी गहराई से समझा।

हर नई जिम्मेदारी उनके लिए सीखने का अवसर थी।

धीरे-धीरे वे अपने अनुशासित कार्यशैली, तथ्यों की सावधानीपूर्वक पुष्टि, संतुलित लेखन और समयबद्ध कार्य निष्पादन के लिए पहचाने जाने लगे।

उनके सहकर्मी उन्हें शांत स्वभाव, जिम्मेदार कार्यशैली और कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित निर्णय लेने वाले पत्रकार के रूप में देखने लगे।

यही अनुभव आने वाले वर्षों में उन्हें संपादकीय नेतृत्व की बड़ी भूमिकाओं के लिए तैयार करने वाला सिद्ध हुआ।


 

डॉ. शरद कुमार शंखधर

भाग–2

राष्ट्रीय पत्रकारिता में उत्कर्ष, संपादकीय नेतृत्व और व्यावसायिक उत्कृष्टता

भारत के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में एक सशक्त पहचान

यह भाग उपलब्ध स्रोत सामग्री पर आधारित है और डॉ. शरद कुमार शंखधर के पत्रकारिता जीवन के उस स्वर्णिम चरण का वर्णन करता है, जिसमें वे एक सामान्य संवाददाता से राष्ट्रीय स्तर के संपादक, मीडिया प्रशासक और संपादकीय नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित हुए।


पत्रकारिता के व्यापक क्षितिज की ओर

पत्रकारिता के प्रारम्भिक वर्षों में मजबूत आधार तैयार करने के बाद डॉ. शरद कुमार शंखधर के जीवन में एक ऐसा दौर आया जिसने उन्हें भारतीय हिंदी पत्रकारिता के अग्रणी संपादकीय व्यक्तित्वों की श्रेणी में स्थापित कर दिया। यह केवल पदोन्नति का समय नहीं था, बल्कि अनुभव, दृष्टि, नेतृत्व और पेशेवर परिपक्वता का निरंतर विस्तार था।

अनेक पत्रकार अपना सम्पूर्ण जीवन एक ही संस्थान में बिताते हैं, किन्तु डॉ. शंखधर ने स्वयं को विभिन्न समाचार संस्थानों, विविध कार्य-संस्कृतियों और अलग-अलग सामाजिक परिवेशों में कार्य करके निरंतर विकसित किया। प्रत्येक नया संस्थान उनके व्यक्तित्व में एक नया आयाम जोड़ता गया। उन्होंने केवल समाचार लिखना नहीं सीखा, बल्कि समाचारों की दिशा निर्धारित करना, पत्रकारों का मार्गदर्शन करना, संपादकीय नीतियाँ बनाना और समाचार-पत्रों की विश्वसनीयता को बनाए रखना भी सीखा।

उनका व्यावसायिक जीवन भारतीय पत्रकारिता के उस दौर के साथ आगे बढ़ा जब मीडिया तीव्र गति से बदल रहा था। पारंपरिक प्रिंट पत्रकारिता से लेकर उपग्रह समाचार चैनलों और फिर डिजिटल मीडिया तक के इस संक्रमण काल में उन्होंने स्वयं को समय के अनुरूप ढाला, परन्तु पत्रकारिता के मूल सिद्धांत—सत्य, निष्पक्षता और उत्तरदायित्व—को कभी नहीं छोड़ा।


दैनिक लोकमत के साथ नई दिशा

वर्ष 1993 में डॉ. शरद कुमार शंखधर ने दैनिक लोकमत से जुड़कर महाराष्ट्र के नागपुर में कार्यभार संभाला।

यह उनके जीवन का पहला बड़ा अवसर था जब उन्होंने उत्तर भारत से बाहर एक भिन्न सांस्कृतिक और भाषाई वातावरण में पत्रकारिता की। इस परिवर्तन ने उनके अनुभवों को नई व्यापकता प्रदान की।

महाराष्ट्र में कार्य करते हुए उन्होंने केवल समाचार-संग्रहण नहीं किया, बल्कि भारतीय समाज की विविधता को निकट से समझा। अलग भाषा, अलग संस्कृति, अलग सामाजिक परिस्थितियाँ और भिन्न प्रशासनिक व्यवस्था ने उन्हें यह अनुभव कराया कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित है।

यह अनुभव उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ। उन्होंने जाना कि क्षेत्र बदल सकते हैं, भाषाएँ बदल सकती हैं, पाठकों की अपेक्षाएँ बदल सकती हैं, किन्तु पत्रकारिता का मूल उद्देश्य हर स्थान पर एक ही रहता है—सत्य को समाज तक पहुँचाना।

नागपुर में बिताया गया यह समय उनके व्यक्तित्व को अधिक व्यापक, अधिक परिपक्व और अधिक संतुलित बनाकर आगे की बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने वाला सिद्ध हुआ।


स्वतंत्र भारत : राजनीतिक और प्रशासनिक पत्रकारिता का अनुभव

दैनिक लोकमत के बाद डॉ. शरद कुमार शंखधर ने 1996–1997 के दौरान स्वतंत्र भारत समाचार-पत्र के साथ लखनऊ में कार्य किया।

लखनऊ केवल उत्तर प्रदेश की राजधानी नहीं, बल्कि राजनीति, प्रशासन और नीति-निर्माण का प्रमुख केंद्र भी है। यहाँ पत्रकारिता का अर्थ केवल घटनाओं का विवरण देना नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली, राजनीतिक निर्णयों और सार्वजनिक नीतियों का गंभीर विश्लेषण करना भी होता है।

राजधानी में कार्य करते हुए उन्हें मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक जीवन की अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियों को निकट से समझने का अवसर मिला।

यहीं उनके भीतर विश्लेषणात्मक दृष्टि और अधिक विकसित हुई। उन्होंने सीखा कि समाचार केवल सूचना नहीं होता, बल्कि उसके पीछे छिपे सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों को समझना भी पत्रकार की जिम्मेदारी है।

उनकी निष्पक्ष रिपोर्टिंग, तथ्यों की गहराई से पड़ताल और संतुलित लेखन शैली ने उन्हें एक गंभीर और विश्वसनीय पत्रकार के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया।


अमर उजाला : पत्रकारिता का स्वर्णिम अध्याय

डॉ. शरद कुमार शंखधर के पत्रकारिता जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे लंबा अध्याय अमर उजाला के साथ जुड़ा हुआ है।

1998 से 2013 तक लगभग पंद्रह वर्षों की यह अवधि उनके व्यावसायिक जीवन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में गिनी जाती है।

इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित अनेक राज्यों में विभिन्न जिम्मेदारियाँ निभाईं।

यह केवल एक समाचार-पत्र में लंबी सेवा नहीं थी, बल्कि निरंतर बढ़ती जिम्मेदारियों, नेतृत्व क्षमता और संपादकीय उत्कृष्टता का प्रमाण थी।

हर राज्य की अपनी सामाजिक संरचना, राजनीतिक परिस्थितियाँ, सांस्कृतिक परंपराएँ और पाठकों की अपेक्षाएँ थीं। इन सभी विविधताओं के बीच समान रूप से प्रभावी नेतृत्व प्रदान करना किसी भी संपादक के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है।

डॉ. शंखधर ने इन चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।

उन्होंने प्रत्येक क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकताओं को समझते हुए समाचार-पत्र की गुणवत्ता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

उनके नेतृत्व में पत्रकारिता केवल समाचार प्रकाशित करने का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज की आवाज़ और लोकतांत्रिक मूल्यों की अभिव्यक्ति का सशक्त मंच बनी रही।


संपादकीय नेतृत्व की ओर निरंतर प्रगति

अनुभव बढ़ने के साथ-साथ डॉ. शरद कुमार शंखधर की जिम्मेदारियाँ भी लगातार बढ़ती गईं।

अपने दीर्घ पत्रकारिता जीवन में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण संपादकीय पदों पर कार्य किया, जिनमें प्रमुख हैं—

  • स्थानीय संपादक (Local Editor)

  • उप संपादक (Deputy Editor)

  • वरिष्ठ उप संपादक (Senior Deputy Editor)

  • मुख्य उप संपादक (Chief Deputy Editor)

  • ब्यूरो प्रभारी (Bureau In-charge)

  • विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

  • विशेष राजनीतिक संवाददाता (Special Political Correspondent)

  • प्रधान संपादक (Editor-in-Chief)

इन पदों पर कार्य करना केवल समाचार संपादन तक सीमित नहीं होता।

एक संपादक को प्रतिदिन अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेने होते हैं—कौन-सा समाचार प्रमुख होगा, किन तथ्यों की पुनः पुष्टि आवश्यक है, किस प्रकार निष्पक्षता बनाए रखी जाए, किस प्रकार युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन किया जाए तथा कैसे समाचार-पत्र की विश्वसनीयता हर परिस्थिति में सुरक्षित रखी जाए।

डॉ. शंखधर अपनी अनुशासित कार्यशैली, त्वरित निर्णय क्षमता और संपादकीय संतुलन के लिए विशेष रूप से पहचाने जाने लगे।

उनके सहयोगी उन्हें ऐसे नेतृत्वकर्ता के रूप में देखते थे जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर उचित निर्णय लेने में सक्षम थे।


भारत के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों से जुड़ाव

अपने लगभग चार दशकों के पत्रकारिता जीवन में डॉ. शरद कुमार शंखधर ने भारत के अनेक प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में कार्य किया।

इनमें प्रमुख हैं—

  • वीर अर्जुन

  • दैनिक लोकमत

  • स्वतंत्र भारत

  • अमर उजाला

  • दैनिक जागरण

  • संध्या टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया समूह)

  • हिंदी साप्ताहिक चौथी दुनिया

  • हिंदुस्तान समाचार फीचर सेवा

  • कैनविज टाइम्स

  • दैनिक भास्कर

  • दैनिक जनमोर्चा (बरेली)

  • बरेली की आवाज़

इन संस्थानों के साथ कार्य करते हुए उन्होंने भारतीय मीडिया जगत की विविध कार्यप्रणालियों, संपादकीय दृष्टिकोणों और पाठकीय अपेक्षाओं को गहराई से समझा।

बहुत कम पत्रकार ऐसे होते हैं जिन्हें इतने विविध और प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी क्षमता सिद्ध करने का अवसर प्राप्त होता है।

यह उनकी पेशेवर विश्वसनीयता, कार्यकुशलता और उत्कृष्ट पत्रकारिता का प्रमाण है।


पाँच राज्यों और बीस से अधिक जिलों का व्यापक अनुभव

डॉ. शंखधर के पत्रकारिता जीवन की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में से एक है उनका विशाल भौगोलिक अनुभव।

उन्होंने भारत के पाँच राज्यों तथा बीस से अधिक जिलों में कार्य करते हुए समाज के विविध स्वरूपों को निकट से देखा।

ग्रामीण भारत की चुनौतियाँ, छोटे शहरों की आकांक्षाएँ, महानगरों की जटिलताएँ, प्रशासनिक व्यवस्थाएँ, राजनीतिक परिवर्तन और सामाजिक बदलाव—इन सभी को उन्होंने प्रत्यक्ष अनुभव किया।

इसी कारण उनके लेखन में केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि धरातल की वास्तविकता दिखाई देती है।

उनकी पत्रकारिता सदैव जनसरोकारों से जुड़ी रही।


भारतीय पत्रकारिता के परिवर्तन के साक्षी

डॉ. शरद कुमार शंखधर उन विरले पत्रकारों में हैं जिन्होंने भारतीय पत्रकारिता के लगभग प्रत्येक तकनीकी परिवर्तन को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उसके साथ स्वयं को सफलतापूर्वक ढाला।

उन्होंने अपना करियर उस समय प्रारंभ किया जब समाचार-पत्र पारंपरिक तकनीकों से तैयार होते थे।

इसके बाद उन्होंने क्रमशः—

  • मैनुअल न्यूज़रूम,

  • कंप्यूटरीकृत समाचार-संपादन,

  • उपग्रह आधारित समाचार प्रसारण,

  • ऑनलाइन पत्रकारिता,

  • सोशल मीडिया आधारित रिपोर्टिंग,

  • तथा मोबाइल-प्रथम (Mobile First) डिजिटल पत्रकारिता

जैसे सभी महत्वपूर्ण परिवर्तनों का अनुभव किया।

इन सभी परिवर्तनों के बीच उन्होंने एक बात कभी नहीं बदली—पत्रकारिता का नैतिक आधार।

उनका मानना था कि तकनीक समाचार पहुँचाने की गति बढ़ा सकती है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता केवल पत्रकार की ईमानदारी से ही सुनिश्चित होती है।


डिजिटल युग की ओर सफल संक्रमण

जब भारतीय मीडिया तेजी से डिजिटल मंचों की ओर अग्रसर हुआ, तब अनेक अनुभवी पत्रकार स्वयं को नई तकनीक के अनुरूप ढालने में कठिनाई अनुभव कर रहे थे।

किन्तु डॉ. शरद कुमार शंखधर ने इस परिवर्तन को खुले मन से स्वीकार किया।

उन्होंने यह समझ लिया कि भविष्य की पत्रकारिता केवल मुद्रित समाचार-पत्रों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल माध्यम समाज तक सूचना पहुँचाने का सबसे प्रभावी साधन बनेंगे।

इसी दूरदर्शिता ने उन्हें प्रिंट मीडिया से डिजिटल मीडिया की ओर सफलतापूर्वक आगे बढ़ने में सहायता की।

उन्होंने सिद्ध किया कि यदि मूल सिद्धांत मजबूत हों, तो माध्यम बदलने से पत्रकारिता की आत्मा नहीं बदलती।


जनविश्वास से निर्मित प्रतिष्ठा

पत्रकारिता में वास्तविक सफलता पदों, पुरस्कारों या लोकप्रियता से नहीं मापी जाती।

उसका सबसे बड़ा आधार होता है—जनविश्वास।

लगभग चार दशकों की अपनी यात्रा में डॉ. शरद कुमार शंखधर ने सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, अनुशासन और निरंतर परिश्रम के माध्यम से यह विश्वास अर्जित किया।

यही विश्वास उन्हें पत्रकारिता जगत में एक सम्मानित संपादक, मार्गदर्शक और विश्वसनीय मीडिया व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करता है।

उनकी प्रतिष्ठा किसी एक समाचार-पत्र या एक पद की देन नहीं, बल्कि वर्षों तक निभाए गए नैतिक दायित्वों का परिणाम है।


 

डॉ. शरद कुमार शंखधर

भाग–3

साहित्य, सम्मान, नेतृत्व, विरासत और अनवरत मिशन

पत्रकारिता, साहित्य और राष्ट्रनिर्माण को समर्पित एक जीवन

यह भाग उपलब्ध स्रोत सामग्री पर आधारित है और डॉ. शरद कुमार शंखधर के साहित्यिक योगदान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों, नेतृत्व, जीवन-दर्शन तथा उनकी स्थायी विरासत का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है।


साहित्य : एक संवेदनशील मन की अभिव्यक्ति

यदि पत्रकारिता डॉ. शरद कुमार शंखधर का कर्मक्षेत्र रही, तो साहित्य उनकी आत्मा का स्वर रहा। समाचारों की कठोर वास्तविकताओं के बीच भी उन्होंने अपने भीतर के साहित्यकार को सदैव जीवित रखा। उनके लिए पत्रकारिता और साहित्य दो अलग-अलग विधाएँ नहीं थीं, बल्कि समाज की सेवा के दो परस्पर पूरक माध्यम थे।

पत्रकार के रूप में उन्होंने समाज की घटनाओं को तथ्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया, जबकि साहित्यकार के रूप में उन्हीं अनुभवों को भावनाओं, संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। यही कारण है कि उनकी साहित्यिक रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संबंध, आत्मसम्मान, संघर्ष, आशा और जीवन-दर्शन की गहरी झलक मिलती है।

उनकी भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है। वे कठिन से कठिन विचारों को भी सरल शब्दों में प्रस्तुत करने की क्षमता रखते हैं। यही विशेषता उन्हें पत्रकारों के साथ-साथ साहित्यप्रेमियों के बीच भी सम्मान दिलाती है।

वर्षों तक उनकी कविताएँ, कहानियाँ और साहित्यिक लेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार-पत्रों तथा प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे। इन रचनाओं ने उन्हें केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के संवेदनशील रचनाकार के रूप में भी प्रतिष्ठित किया।


प्रकाशित साहित्यिक कृतियाँ

डॉ. शरद कुमार शंखधर ने हिंदी साहित्य को अनेक महत्वपूर्ण कृतियाँ प्रदान की हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में प्रमुख हैं—

ओस की बूँद

यह काव्य-संग्रह जीवन की सूक्ष्म संवेदनाओं, प्रकृति, आशा, संघर्ष और मानवीय भावनाओं का सुंदर चित्रण प्रस्तुत करता है। इसकी कविताओं में जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों को अत्यंत सहज और प्रभावशाली शैली में अभिव्यक्ति मिली है।

स्वाभिमान

यह कहानी-संग्रह आत्मसम्मान, सामाजिक मूल्यों, पारिवारिक संबंधों और मानवीय संघर्षों पर आधारित है। इसकी कहानियाँ समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन को वास्तविकता के साथ प्रस्तुत करती हैं और पाठक को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती हैं।

तबादला

यह कृति समकालीन सामाजिक परिस्थितियों, प्रशासनिक व्यवस्था और मानवीय मनोविज्ञान से जुड़े विषयों पर आधारित है। इसमें सामाजिक परिवर्तन, व्यवस्था की चुनौतियों और व्यक्ति के आंतरिक संघर्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

इन तीनों कृतियों से स्पष्ट होता है कि डॉ. शंखधर का साहित्य केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज को सोचने, समझने और बेहतर दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाला साहित्य है।


सम्मान और अलंकरण

लगभग चार दशकों तक पत्रकारिता और साहित्य में निरंतर योगदान देने वाले डॉ. शरद कुमार शंखधर को अनेक राष्ट्रीय एवं प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है।

उनके प्रमुख सम्मानों में शामिल हैं—

  • गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान

  • प्रेमचंद साहित्य पुरस्कार

  • काका कालेलकर सम्मान

  • कबीर सम्मान

  • तुलसी सम्मान

इनके अतिरिक्त देश की अनेक सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा पत्रकारिता संस्थाओं ने समय-समय पर उन्हें उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।

ये पुरस्कार केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि सत्यनिष्ठ पत्रकारिता, साहित्यिक उत्कृष्टता और समाज के प्रति उनके समर्पण की सार्वजनिक स्वीकृति भी हैं।


मानद डॉक्टरेट : चार दशकों की साधना का सम्मान

डॉ. शरद कुमार शंखधर के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक वह अवसर रहा जब पत्रकारिता और साहित्य में उनके दीर्घकालीन योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।

लगभग चालीस वर्षों तक पत्रकारिता एवं हिंदी साहित्य की सेवा के उपरांत उन्हें Cedarbrook University (USA) द्वारा मानद डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Honorary Ph.D.) की उपाधि तथा स्वर्ण पदक (Gold Medal) से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत जीवन की उपलब्धि नहीं था, बल्कि हिंदी भाषा, भारतीय पत्रकारिता और साहित्य के प्रति उनके आजीवन समर्पण का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया गया सम्मान था।

उनकी इस उपलब्धि पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों से व्यापक प्रशंसा प्राप्त हुई। लगभग बयालीस (42) संस्थाओं—जिनमें शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन, चिकित्सक, अधिवक्ता, व्यापारी संगठन तथा अन्य सार्वजनिक संस्थाएँ शामिल थीं—ने उनका अभिनंदन किया।

यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि उनका योगदान पत्रकारिता की सीमाओं से कहीं आगे बढ़कर समाज के व्यापक हितों तक पहुँचा।


डिजिटल पत्रकारिता में नवाचार

भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में पिछले दो दशकों में डिजिटल क्रांति ने सबसे बड़ा परिवर्तन किया है। अनेक अनुभवी पत्रकार इस परिवर्तन के साथ स्वयं को नहीं जोड़ सके, किन्तु डॉ. शरद कुमार शंखधर ने इसे अवसर के रूप में स्वीकार किया।

उन्होंने समझा कि माध्यम बदल सकता है, लेकिन पत्रकारिता के मूल सिद्धांत नहीं बदलते।

डिजिटल मीडिया में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री अमीषा पटेल द्वारा उन्हें डिजिटल पत्रकारिता में नवाचार एवं उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।

यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि उन्होंने परंपरागत प्रिंट पत्रकारिता और आधुनिक डिजिटल मीडिया के बीच सफलतापूर्वक सेतु का निर्माण किया।


एसकेएस24 न्यूज़ : नई पीढ़ी की पत्रकारिता

समय के साथ डॉ. शरद कुमार शंखधर ने अपनी पत्रकारिता को केवल समाचार-पत्रों तक सीमित नहीं रखा।

उन्होंने SKS24NEWS डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म के प्रधान संपादक (Editor-in-Chief) के रूप में कार्यभार संभालते हुए डिजिटल पत्रकारिता में नई दिशा प्रदान की।

उनके नेतृत्व में इस मंच का उद्देश्य केवल समाचार प्रकाशित करना नहीं, बल्कि सत्यापित, संतुलित और समाजोपयोगी पत्रकारिता को बढ़ावा देना रहा है।

वे मानते हैं कि डिजिटल युग में समाचारों की गति जितनी महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उनकी विश्वसनीयता है।

इसी सिद्धांत के आधार पर उन्होंने डिजिटल मीडिया में भी वही संपादकीय मानक स्थापित करने का प्रयास किया, जिनका पालन उन्होंने अपने पूरे पत्रकारिता जीवन में किया।


संगठनात्मक नेतृत्व

डॉ. शरद कुमार शंखधर का योगदान केवल समाचार कक्षों तक सीमित नहीं रहा।

उन्होंने पत्रकारों के संगठन, पत्रकारिता की गरिमा और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

वर्तमान में वे विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं—

  • प्रधान संपादक – SKS24NEWS

  • संवाददाता – अमर उजाला

  • जिला अध्यक्ष – बदायूँ प्रेस क्लब

  • प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य – उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ

इन दायित्वों के माध्यम से वे पत्रकारों के अधिकारों, पत्रकारिता की नैतिकता तथा संगठनात्मक मजबूती के लिए निरंतर कार्यरत हैं।


नई पीढ़ी के मार्गदर्शक

डॉ. शरद कुमार शंखधर का मानना है कि पत्रकारिता केवल व्यक्तिगत सफलता का माध्यम नहीं है।

एक अनुभवी पत्रकार का दायित्व है कि वह अपने अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुँचाए और उन्हें सही दिशा प्रदान करे।

चार दशकों के अनुभव के आधार पर उन्होंने अनेक युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन किया है।

वे सदैव इस बात पर बल देते हैं कि—

  • तथ्य की पुष्टि के बिना कोई समाचार प्रकाशित नहीं होना चाहिए।

  • पत्रकारिता में निष्पक्षता सर्वोच्च मूल्य है।

  • समाचार और विचार में स्पष्ट अंतर होना चाहिए।

  • पत्रकार की सबसे बड़ी पूँजी उसका चरित्र और विश्वसनीयता है।

उनकी यही शिक्षाएँ आज भी अनेक युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।


जीवन-दर्शन

डॉ. शरद कुमार शंखधर के सम्पूर्ण जीवन का सार एक सरल किन्तु अत्यंत गहन विचार में समाहित है—

"पत्रकारिता समाज की सेवा का माध्यम है, न कि केवल आजीविका का साधन।"

उन्होंने बदलती सरकारों, बदलती तकनीकों और बदलते मीडिया परिवेश के बीच भी सत्य, निष्पक्षता, जिम्मेदारी और जनविश्वास को सर्वोच्च स्थान दिया।

उनका विश्वास है कि पत्रकार का वास्तविक सम्मान किसी पुरस्कार से नहीं, बल्कि समाज के विश्वास से मिलता है।

इसी प्रकार वे साहित्य को केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों को संरक्षित रखने का प्रभावी माध्यम मानते हैं।

पत्रकार और साहित्यकार—इन दोनों भूमिकाओं का संतुलन उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता है।


विरासत

डॉ. शरद कुमार शंखधर की चार दशकों से अधिक लंबी यात्रा केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय हिंदी पत्रकारिता के विकास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

उनकी विरासत को निम्न बिंदुओं में समझा जा सकता है—

  • चार दशकों से अधिक का निरंतर पत्रकारिता अनुभव।

  • भारत के अनेक प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में संपादकीय नेतृत्व।

  • पाँच राज्यों और बीस से अधिक जिलों में सक्रिय पत्रकारिता।

  • हिंदी साहित्य में कविता, कहानी और अन्य रचनात्मक योगदान।

  • प्रिंट पत्रकारिता से डिजिटल पत्रकारिता तक सफल संक्रमण।

  • पत्रकार संगठनों में सक्रिय नेतृत्व।

  • नई पीढ़ी के पत्रकारों का मार्गदर्शन।

  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और प्रतिष्ठा।

  • सत्य, निष्पक्षता और जनविश्वास पर आधारित पत्रकारिता की सशक्त परंपरा।

इन सभी उपलब्धियों ने उन्हें केवल एक वरिष्ठ पत्रकार नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता के एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है जिनकी पहचान उनके पदों से अधिक उनके सिद्धांतों से होती है।


उपसंहार

डॉ. शरद कुमार शंखधर का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि वास्तविक सफलता पद, प्रसिद्धि या पुरस्कारों से नहीं, बल्कि समाज पर छोड़े गए सकारात्मक प्रभाव से मापी जाती है।

वर्ष 1989 में एक युवा पत्रकार के रूप में प्रारम्भ हुई उनकी यात्रा आज भारतीय पत्रकारिता, हिंदी साहित्य और डिजिटल मीडिया के एक सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने समाचारों को केवल प्रकाशित नहीं किया, बल्कि उन्हें सामाजिक चेतना का माध्यम बनाया। उन्होंने साहित्य को केवल लिखा नहीं, बल्कि उसे मानवीय मूल्यों का दर्पण बनाया। उन्होंने संपादकीय नेतृत्व को केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं माना, बल्कि उसे सत्य, निष्पक्षता और जनविश्वास की रक्षा का दायित्व समझा।

चार दशकों से अधिक की उनकी साधना यह सिद्ध करती है कि पत्रकारिता का वास्तविक उद्देश्य सत्ता का अनुकरण नहीं, बल्कि समाज का मार्गदर्शन है; साहित्य का उद्देश्य केवल शब्दों की सजावट नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का संरक्षण है; और सार्वजनिक जीवन का सर्वोच्च आदर्श सेवा, सत्य तथा उत्तरदायित्व है।

आज डॉ. शरद कुमार शंखधर एक वरिष्ठ पत्रकार, प्रख्यात संपादक, सम्मानित साहित्यकार, दूरदर्शी मीडिया नेतृत्वकर्ता और नैतिक पत्रकारिता के सशक्त प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी जीवन-यात्रा आने वाली पीढ़ियों के पत्रकारों, लेखकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी तथा यह संदेश देती रहेगी कि सत्य के प्रति निष्ठा, ज्ञान के प्रति समर्पण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व ही किसी भी पत्रकार की सबसे बड़ी पहचान होते हैं।

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